यमुनानगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज, मामला लोहगढ़ से जुड़ा होने के कारण जीरकपुर थाने में ट्रांसफर हुआ केसबाबा ने लोहगढ़ धाम नाम से बनाया था मंदिर, पब्लिसिटी के लिए सेलीब्रिटी को करता था आमंत्रित
संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। यमुनानगर की एक 17 वर्षीय नाबालिग विकलांग लड़की से एक ढोंगी बाबा ने इलाज के बहाने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि मामले में पीडि़त युवती ने यमुनानगर थाने में आरोपी ढाेंगी बाबा तजिंदरपाल सिंह निवासी लोहगढ़ के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दी थी। मामला जीरकपुर के लोहगढ़ क्षेत्र में जुड़ा होने के चलते मामले में यमुनानगर पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर केस को जीरकपुर थाने में ट्रांसफर कर दिया।
मामले में जीरकपुर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं व पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जीरकपुर पुलिस का कहना है कि आरोपी फरार है जिसकी तलाश जारी है।
पीडि़त युवती मूल रूप में यमुनानगर की है। वह बचपन से दिव्यांग है और मानसिक तौर पर ठीक नहीं है। आरोपी ढोंगी बाबा तजिंदरपाल सिंह ने जीरकपुर में लोहगढ़ धाम मंदिर बनाया हुआ है। यहां चौकी के बहाने वह लोगों का शर्तिया इलाज करने का दावा करता था। उसने इस लोहगढ़ धाम मंदिर में अपनी पब्लिसिटी के लिए कई सेलीब्रिटी को भी बुलाया करता था। यमुनानगर के पीडि़त परिवार को भी किसी जानकार ने इस बाबा के बारे में जानकारी दी थी कि वह उनकी मानसिक तौर से परेशान बच्ची का इलाज कर देगा।
पीड़ित परिवार डेढ़ महीने में दो बार इस बाबा के मंदिर में चौकी भरने आया। इसी साल पहली बार वह फरवरी में ढोंगी से मिले। उसके बाद तजिंदरपाल सिंह ने उसे 13 मार्च को यमुनानगर के मंदिर बुलाया। ढोंगी नाबालिग बच्ची को इलाज के बहाने कमरे में ले गया और मां-बाप को बाहर रुकने के लिए कहा। कुछ समय बाद पीडि़त परिवार अपनी बच्ची को लेकर दोबारा यमुनानगर लौट गया। घर जाकर नाबालिग बच्ची की तबीयत खराब हो गई। जब पीडि़त बच्ची की मां ने उससे पूछा तो उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी मां को दी। जिसके बाद ढोंगी बाबा के खिलाफ यमुनानगर थाने में दुष्कर्म की शिकायत दी गई और जीरो एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मामला जीरकपुर थाना पुलिस को ट्रांसफर कर दिया।
जिक्रयोग है कि आरोपी तजिंदर पाल सिंह वर्ष 2007-2009 में मनीमाजरा में रेडीमेड कपड़े का काम करता था। वह संयुक्त व्यापार मंडल मनीमाजरा वार्ड नंबर-9 का प्रधान भी रह चुका है। इसके अलावा वह कपड़े व पैसों की कमेटी डाला करता था। पैसों के लेनदेन में घाटा पड़ने पर उसने अपना पंचकूला वाला मकान बेचकर कर्ज उतारा और लोहगढ़ शिफ्ट हो गया था। इससे पहले वह गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन भी करता रहा है और वहां भी सफलता ना मिलने के बाद उसने लोहगढ़ धाम से मंदिर बना लिया और लोगों का इलाज शुरू किया।