मोहाली। फेज-6 में स्थित डॉ. बी आर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज को नेशनल मेडिकल कमीशन के द्वारा लेटर ऑफ परमिशन (एलओपी) जारी कर दिया गया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज को साल 2021-2022 के अकादमिक सेशन को शुरू करने की इजाजत मिल गई है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज पिछले डेढ़ महीने से इंतजार कर रहा था। वहीं, कॉलेज के डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती ने बताया कि एलओपी मिलने से मेडिकल कॉलेज उन स्टेट मेडिकल कॉलेजों के श्रेणी में शामिल हो गया है। जहां से बेहतर डॉक्टर निकलते हैं।
जानकारी के मुताबिक, सितंबर महीने में नेशनल मेडिकल कमीशन के द्वारा अपने दो दिनों के दौरे में कॉलेज का निरीक्षण किया गया था। अक्तूबर में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था, जिससे यह पक्का हो गया था कि कॉलेज को एलओपी भी जल्द जारी होगी, लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद 11 नवंबर की रात नौ बजे नेशनल मेडिकल कमीशन के द्वारा ईमेल के जरिए एलओपी जारी की गई। इसके बाद मोहाली मेडिकल कॉलेज को साल 2021-2022 के एमबीबीएस कोर्स के लिए अकादमिक सेशन को शुरू करने की इजाजत मिल गई। एलओपी मिल जाने के बाद मोहाली मेडिकल कॉलेज देश के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सूची में शामिल हो गया है। ऐसे में कॉलेज की डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल द्वारा कॉलेज सेशन को बेहतरीन बनाने के लिए दिन रात बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस से बातचीत की जा रही है।
कॉलेज से सिविल अस्पताल को अलग होने में लगेगा समय : डॉ भवनीत
डॉ. बी आर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज के डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती ने बताया कि एलओपी मिलने से मेडिकल कॉलेज को 2021-2022 के एमबीबीएस कोर्स के अकादमिक सेशन को शुरू करने अनुमति मिल गई है। इसके लिए हमारा पूरा स्टाफ पिछले डेढ़ महीने से इंतजार कर रहा था। इसके बाद बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस को पत्र लिखा जाएगा के वे नए सेशन के लिए शुरू होने वाली काउंसलिंग में हमारे कॉलेज का नाम भी लिस्ट में शामिल करें। नवंबर महीने के अंत तक कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स फर्स्ट ईयर के छात्रों की दाखिला प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए फैकल्टी पहले से ही तैयार हैं। वहीं, हॉस्टल की सुविधाएं भी मुकम्मल कर ली गई हैं।
कॉलेज के प्रोफेसर ओपीडी में ही देंगे ड्यूटी
डॉ. भवनीत भारती ने बताया कि काउंसलिंग शुरू होने से पहले जैसे सिविल अस्पताल और मेडिकल कॉलेज काम कर रहा था वह वैसे ही करता रहेगा। क्योंकि अभी छात्रों की दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है इसलिए मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर फिलहाल ओपीडी में ही ड्यूटी देंगे। वहीं, अस्पताल स्टाफ भी हमें सहयोग देता रहेगा, क्योंकि वे सीनियर रेजिडेंट के तौर पर हमें सहयोग दे रहे हैं जो मेडिकल कॉलेज की जरूरत है। ऐसा नहीं है कि एलओपी मिलने के बाद सिविल अस्पताल का नाम नहीं लिया जाएगा। नाम लिया जाएगा, लेकिन जब तक कॉलेज पूरी तरह काम करना शुरू नहीं करता तब तक सिविल अस्पताल और उसका स्टाफ हमारे साथ ही काम करता रहेगा।