किशोर के परिजन सरकारी नौकरी करते हैं। पिता की एक किडनी खराब होने से वह बीमार रहते हैं। उन्होंने अपने इलाज और मुश्किल समय के लिए पैसे जोड़कर रखे थे जबकि मां ने हाल ही में अपने पीएफ अकाउंट से दो लाख रुपये निकाले थे और अपने बैंक अकाउंट जमा कर रखे थे। लड़के ने उनके पीएफ के पैसे भी उड़ा दिए।
पता चला है कि माता-पिता को अपने बच्चे पर पूरा विश्वास था। ऐसे में बेटा मां के बैंक अकाउंट से उनकी अन्य काम के लिए भी पेेमेंट करता था इसलिए बेटे के पास बैंक अकाउंट की पूरी डिटेल थी और इसी चीज का उसने फायदा उठाया। ऑनलाइन पेमेंट ट्रांसफर करके वह पूरी जानकारी डिलीट कर देता था ताकि किसी को पता न चले।
अब परिजनों का कहना है कि उन्होंने अब बेटे को स्कूटर रिपेयर की दुकान पर छोड़ दिया है ताकि उसे अहसास हो कि उसने क्या किया है और पैसे कैसे कमाए जाते हैं, इसका पता चल सके। अब पैरेंट्स उसे किसी भी काम के लिए भविष्य में उसे पैसे नहीं देंगे।
ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होने के बाद पबजी के चक्कर में फंसा बेटा
वहीं, दूसरा मामला मोहाली निवासी 10वीं में पढ़ रहे एक अन्य किशोर का है। लड़के के पिता बिजनेसमैन हैं। उनका बेटा चंडीगढ़ के नामी स्कूल में पढ़ता है। करीब तीन महीने पहले जब से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुई थीं, तभी से उनका बेटा पबजी गेम का शिकार हो गया। लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं थी। शुरू में अचानक उनके घर से कभी 10 हजार तो कभी 15 हजार रुपये गायब होने लगे।
पिता ने बताया कि हमारी ज्वाइंट फैमिली है। ऐसे में परिवार का माहौल खराब हो रहा था लेकिन नजर सब पर रहती थी। हालांकि करीब 15 दिन से उनका बेटा नॉर्मल नहीं था। ऐसे में वह भी काफी परेशान थे। उन्होंने उसका मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास इलाज भी शुरू कर दिया था।
बिजनेसमैन ने बताया कि दो दिन पहले रात को उन्होंने मोबाइल चेक किया तो उसमें पबजी गेम्स इंस्टॉल मिलीं। इसके बाद जब उन्होंने मोबाइल का कवर खोला तो उसमें एक सिम निकली। उन्होंने जब सिम को मोबाइल में डालकर मोबाइल चालू किया तो मेरे नाम वाला एक मैसेज फ्लैश हुआ। उसमें एक पेटीएम अकाउंट था, जिसमें करीब 56 हजार रुपये किसी को ट्रांसफर किए गए थे। जब उन्होंने बेटे से सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह पबजी खेलता है और उसने गेम्स में वर्चुअल हथियार (अन नान कैश) और जैकेट स्किन खरीदने के लिए पैसों का इस्तेमाल किया है।
दादा का बैंक अकाउंट किया हैक, हथियार बेचने वाला शातिर
बिजनेसमैन ने बताया कि उनके पिता जी सरकारी नौकरी से रिटायर्ड हैं। ऐसे में उनके बैंक अकाउंट में पेंशन आती थी। बेटे ने उनका अकाउंट हैक करके भी काफी पैसे उड़ाए थे। उनको बेटे ने बताया कि वह एक युवक से ऑनलाइन वर्चुअल हथियार खरीदता है। जब उन्होंने उस नंबर पर बात की तो पहले वह लड़का कहता कि वह मुंबई से बात कर रहा है।
जब उन्होंने पुलिस शिकायत की बात कही तो उसने जीकरपुर का रहने वाला बताया। वहीं, उसने भी फर्जी नाम से अकाउंट बनाया है। जिसमें वह पैसे डलवाता रहा है। बिजनेसमैन ने अन्य पैरेंट्स से विनती की है कि जिनके बच्चों को यह लत लगी है और उनके बैंक अकाउंट से पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर हुए ह्रैं वह सामने आएं और पुलिस तक अप्रोच कर मामलों की शिकायत दर्ज करवाएं, तभी ऐसे ठगी रने वाले लोग पकड़े जा सकते हैं। वरना यह ठगी का खेल चलता रहेगा और मासूम बच्चे उनके शिकार होकर लूटते रहेंगे।
सीमा में रहकर उठाना होगा गेम्स का आनंद
पबजी गेम्स तो एक मनोरंजन का साधन है। पैरेंट्स को अपनी भूमिका निभानी होगी। क्योंकि जो वर्चुअल हथियार हैं, या पांच अन्य चीजें गेम्स में इस्तेमाल होती हैं, वह पेड होती हैं, बाकायदा वहां पर इसके रेट लगे होते हैं। मैं और बेटा काफी समय से गेम खेल रहे हैं। लेकिन अपनी सीमा में रहकर हम गेम्स का आनंद उठाते हैं। जिससे कोई पैसे का नुकसान न हो। -अभिषेक पराशर, निवासी खरड़
पबजी गेम्स अन्य गेम्स की तरह हैं। इस बात को बच्चों को खुद समझना होगा। गेम्स में कई तरह की शर्ते हैं। उन्हें पूरा करने के बाद ही यह गेम खेलने वाला आगे बढ़ पाता है। अगर पैरेंट्स शुरू से ही बच्चों पर ध्यान रखें तो ऐसी नौबत नहीं आएगी। - राहुल
गेम खेलकर चिड़चिड़े हो रहे बच्चे
हिंसक वाले गेम बंद होने चाहिए। बच्चों को इतनी समझ नहीं होती। इस तरह के गेम खेलकर उन्हें छुरी व बंदूक चलाने की प्रेरणा मिलती है। मैंने कई बच्चों को देखा है जो अपने पैरेंट्स के साथ बदतमीजी से पेश आते हैं। पूछने पर पता चला कि मोबाइल गेम खेलकर ऐसा व्यवहार हो गया है। - विनोद इंदौरी, अभिभावक सेक्टर 49
बच्चों पर नजर रखें अभिभावक
बच्चे मोबाइल पर गेम्स खेल रहे हैं तो इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी पैरेंट्स की आती है। पैरेंट्स अपने बच्चों पर नजर रखें। उसके बराबर टच में रहे। मोबाइल देने से बचें। साथ ही सरकार को भी इन पर रोक लगानी चाहिए। - कौशल सिंह, अभिभावक सेक्टर 48