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पोलिंग बूथ पर पहुंचे मुख्य निर्वाचन अधिकारी पहुंचे, बीएलओ मिला गैर हाजिर

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मोहाली। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से बैठक का समय मिलने के बाद एन मौके पर बैठक रद्द करने से गुस्साए (कोरोना वारियर्स) नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी संघर्ष की राह पर आ गए। तेरह मुलाजिम सीएम सिटी स्थित ड्रग एंड फूड टेस्टिंग लैब की 7वीं मंजिल पर चढ़ गए। साथ ही संघर्षरत मुलाजिमों की एसोसिएशन ने तय किया है कि अब आरपार की जंग लड़ी जाएगी। जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता है, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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जानकारी के मुताबिक, पंजाब के सेहत विभाग के अधीन करीब 13 सालों से अनुबंध पर काम कर रहे नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी पहले से ही तय बैठक के लिए शनिवार को खरड़ सिविल अस्पताल में इकट्ठे हुए थे। जब सारे मुलाजिम नेता वहां पर पहुंच गए तो उसके बाद जिला प्रशासन ने बैठक से टाल मटोल की कोशिशें शुरू कर दीं। इसके बाद सारे मुलाजिम गुस्से में आए गए। साथ ही 13 मुलाजिम ड्रग एंड फूड टेस्टिंग लैब की 7वीं मंजिल पर चले गए। जबकि उनके साथ कुछ नीचे ग्राउंड में जुट गए।
सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। काफी संख्या में पुलिस कर्मी व अफसर वहां पहुंचे। नेशनल हेल्थ मिशन इंप्लाइज के सूबा प्रधान डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि वह करीब 12 हजार कर्मचारी हैं। इनमें डॉक्टर, स्टाफ नर्स, सीएचओ, टीबी विभाग के कर्मचारी, दफ्तरी मुलाजिम शामिल है। यह सारे मुलाजिम दिन-रात शहरी व ग्रामीण एरिया में सेवाएं दे रहे हैं। कोरोनाकाल के दौरान भी इन मुलाजिमों ने सेवाएं दी। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है।
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पंजाब अपने पड़ोसी राज्यों से कुछ सीखे
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश या तो मुलाजिमों को पक्के कर चुक हैं या फिर उन्हें पक्के मुलाजिमों के रूप में वेतन दिया जा रहा है। जबकि पंजाब में हालात काफी खराब हैं। एसोसिएशन के सूबा नेता अमरजीत सिंह, अरूणदत्त, मनिंदर सिंह, डॉ. वाहिद, हरमनदीप कौर, जसविंदर कौर, हरपाल सिंह सोढी व कमलप्रीत कौर ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अब आरपार की जंग होगी। सेवाएं नियमित न होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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