मोहाली। चंडीगढ़ के डंपिंग ग्राउंड में आग लगने की घटना के बाद बुधवार को मोहाली नगर निगम भी हरकत में आ गया। मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू ने अधिकारियों की टीम के साथ इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8बी स्थित डंपिंग ग्राउंड में पहुंचकर कूड़े की प्रोसेसिंग का जायजा लिया। इस मौके पर मेयर ने कहा कि लगातार छह महीने से कूडे़ की प्रोसेसिंग का काम चल रहा है। इस दौरान 300 लाख टन कूड़े में से 50 हजार टन कूड़े की प्रोसेसिंग हो चुुुकी है। इस साल दिसंबर के आखिर तक यह कूड़े का पहाड़ खत्म हो जाएगा। इससे इलाके के लोगों को काफी फायदा होगा और स्वच्छता रैंकिंग भी सुधरेगी।
नगर निगम का डंपिंग ग्राउंड इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8बी में है। पूरे शहर से रोजाना 80 लाख टन कूड़ा पैदा होता है। इसमें से 50 टन कूड़ा डंपिंग ग्राउंड पर प्रोसेस होता है, जबकि शेष गीला कूड़ा नगर निगम की 16 साइटों पर प्रोसेस किया जाता है और इससे खाद बनाई जाती है। हालांकि डंपिंग ग्राउंड से रोजाना 600 टन कूड़ा प्रोसेस किया जा रहा है। इस मौके पर मेयर ने कहा कि अगर पिछले साल बरसात का मौसम लंबा न चलता तो कूड़े को प्रोसेस करने का काम काफी हद तक खत्म हो जाना था। उन्होंने कहा कि अगर इस बार बरसात का मौसम साधारण रहा तो इस साल के आखिर तक इस ग्राउंड का लेवल समतल की दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस स्थिति पर नजर रखी जाए कि यहां कूड़े को किसी भी तरह की आग न लगे। याद रहे कि मोहाली में कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का ठेका नगर निगम की तरफ से एक निजी कंपनी को सौंपा गया था। इस काम पर 4.35 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस मौके पर डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी, एक्सईएन हरप्रीत सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस तरह किया जाता है कूड़े का सेग्रीगेशन
इंडस्ट्रियल एरिया स्थित डंपिंग प्वाइंट में कूड़े की सेग्रीगेशन (पृथक्करण) का काम पूरे जोरों से चल रहा है। इस दौरान कूड़े से लिफाफे अलग निकाले जाते हैं। इसके अलावा ज्वलनशील पदार्थों को अलग किया जाता है। गीला कूड़ा और मलबा भी अलग किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस कूड़े के ढेर के खत्म होने के बाद लोगों को काफी राहत मिलेगी। इलाके में रोजाना सुबह-शाम उठने वाली बदबू से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।
कूड़े के पहाड़ का मामला पहुंच चुुका है हाईकोर्ट
इस इलाके में कूड़े के पहाड़ का मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है। इलाके के लोगों ने अदालत में एक केस दायर किया था। उनका कहना था कि डंपिंग प्वाइंट की साइट उचित नहीं है। यह उस एरिया पर है, जहां से रिहायशी एरिया कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसके अलावा कई नामी कंपनियां भी नजदीक ही हैं। इसके बाद नगर निगम ने कूड़े की प्रोसेसिंग का काम शुरू किया था।