नयागांव। नगर काउंसिल के अधीन आते गांव कांसल में 2012 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्माण पर रोक लगाई थी। अदालत के आदेशों की यहां धज्जियां उड़ रही हैं। जिस इलाके में एक ईंट नहीं लगाई जा सकती है, वहां सरकारी अधिकारियों समेत रसूख वाले लोगों ने अपने आलीशान घर बना लिए हैं जबकि इलाके के लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार इस मामले को उच्च अदालत में गंभीरता से उठाना चाहिए ताकि उचित तरीके से इलाके का विकास हो पाए।
23 मई 2012 को सुखना कैचमेंट में नवनिर्माण पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। नगर काउंसिल नयागांव के गांव कांसल का इलाका भी सुखना कैचमेंट के इलाके में आता है। हाईकोर्ट की रोक के बावजूद यहां पर कई इलाके बस चुके हैं। इसमें कई नामी कॉलोनियां शुमार हैं।
हालांकि जानकारों की माने तो इसके लिए नगर काउंसिल के उस समय के अधिकारी इस चीज के लिए जिम्मेदार है। लोगों का कहना है कि जब इलाके में कोई भी निर्माण नहीं हो सकता तो उन अधिकारियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए जिन्होंने खुद ही यहां पर मकान बनाए हुए हैं। लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोगों को सड़क एवं ड्रेनेज लाइन जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं।
कोट
मेरे समय पर निर्माण करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उससे पहले क्या हुआ है, उसके लिए मैं जवाब नहीं दे सकता हूं। विभाग जांच कर रहा है। जांच में सब सामने आ जाएगा। -वीरेंद्र जैन, कार्यकारी अधिकारी, नगर काउंसिल नयागांव
अवैध कॉलोनी के निर्माण संबंधी एक पत्र जारी किया गया था। अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। सुखना कैचमेंट का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। -अमरदीप गुजराल, एडीसी विकास (मोहाली)