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बसों के लिए बनाए क्यू शेल्टर पर सवारियों के लिए रुकते हैं ऑटो

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मोहाली। वीआईपी शहर मोहाली को सिटी लोकल बस सर्विस न मिलने का खामियाजा शहरवासियों के साथ-साथ अब लाखों के बनाए गए बस क्यू शेल्टर भी भुगत रहे हैं। आलम यह है कि बस क्यू शेल्टर पर बसें तो आती नहीं, इसलिए बस क्यू शेल्टर सवारियों को ऑटो मुहैया करवाकर लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस तरह अब बस क्यू शेल्टर ऑटो क्यू शेल्टर बनकर रह गए हैं। आम भाषा में कहें तो बस क्यू शेल्टर ने बस चालकों की जगह अब ऑटो चालकों के साथ दोस्ती कर ली है, जिसकी मदद से क्यू शेल्टर सवारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का फर्ज अदा कर रहे हैं।
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बता देें कि नगर निगम की ओर से एक प्रोजेक्ट के तहत लोगों के लिए शहर में जगह-जगह बस क्यू शेल्टर बनाकर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन लोकल सिटी बसेें नहीं चलने के कारण अब यह बस क्यू शेल्टर बसें नहीं चलने से सुनसान पड़े हुए थे। जबकि इन बस क्यू शेल्टर्स को बनाने के पीछे मकसद यह था कि सिटी बस अलग-अलग सेक्टरों के अंदर से होते हुए इन क्यू शेल्टर पर पहुंचेंगी और यहां बैठकर इंतजार कर रही सवारियों को लेकर उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी। लेकिन नगर निगम की अनदेखी का नतीजा यह है कि वर्षों से बस क्यू शेल्टर्स बनकर तैयार पड़े हैं और इनमें आने वाली सवारियां बस की जगह ऑटो में सवार होकर अपने गंतव्य को चली जाती हैं। इस तरह यह बस क्यू शेल्टर अब ऑटो क्यू शेल्टर बनकर रह गए हैं।
प्रशासन को नहीं लोगों के पैसे की कद्र
लोगों के टैक्स के पैसे की प्रशासन को बिल्कुल कद्र नहीं है, क्योंकि बिना सोचे-समझे लाखों रुपये की लागत से शहर में बस क्यू शेल्टर बनाकर छोड़ दिए गए हैं। इनमें बैठी सवारियों को बस की जगह ऑटो पकड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। -विजय।
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शहरवासियों की समस्याओं को देखते हुए परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर लागू किया जाना चाहिए। जिससे समय रहते लोग इसका फायदा उठा सकें। लोगों ने प्रशासन को टैक्स इसलिए अदा किया है, जिससे उन्हें अच्छी बुनियादी सुविधाएं मिलें। -परवीन।
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