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पशुओं का आतंक : सड़कों पर जानलेवा बना वाहन चलाना

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जीरकपुर। शहर की सड़कों पर पशुओं की बढ़ती संख्या आमजन के लिए गंभीर परेशानी और दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती जा रही है। जीरकपुर के विभिन्न इलाकों, कॉलोनियों, बाजारों और मुख्य मार्गों पर पशु झुंड बनाकर सड़कों के बीचोबीच बैठे या घूमते देखे जा सकते हैं। इससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पशुओं के कारण कुछ माह में कई लोग जहां घायल को गए हैं, वहीं कई की मौत भी हो गई है। नगर परिषद इनको गोशाला भेजने का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। पशु न केवल सड़कों पर यातायात में बाधा बन रहे हैं, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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ये पशु जगह-जगह गंदगी फैला रहे हैं। इससे दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना रहता है। कई बार ये पशु आपस में लड़ पड़ते हैं। इससे आसपास वाहनों को नुकसान पहुंचता है। इससे राहगीरों की जान जोखिम में पड़ जाती है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए इन सड़कों से गुजरना बेहद मुश्किल हो गया है।फ्लाईओवर के नीचे और व्यस्त मार्गों पर पशु झुंड में नजर आते हैं। अचानक सड़क पर जाने से वाहन चालकों को ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इससे पीछे चल रहे वाहनों के टकराने का खतरा बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक बनी हुई है। कई लोग तो पशुओं के झुंड देखकर अपना रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों मनोज कुमार, गुरप्रीत सिंह, संजीव शर्मा, शालिनी, नेहा का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये का काऊ-सेस वसूल रही है, इसके बावजूद पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है। लोगों में रोष है कि या तो काऊ-सेस की वसूली बंद की जाए या सड़कों को पूरी तरह आवारा पशुओं से मुक्त कराया जाए।

ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ रहा सीधा असर

पशुओं की बढ़ती संख्या से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमरा गई है। जाम की स्थिति आम हो चुकी है। हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ट्रैफिक प्रभारी मनफूल सिंह का कहना है कि सड़कों पर घूमते पशुओं के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है। पुलिसकर्मियों को यातायात सुचारू रखने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पशुओं को सड़कों से हटाने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है।
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पहले भी हो चुके हैं कई दर्दनाक हादसे
- गाजीपुर गांव में एक सांड़ के हमले में एक बुजुर्ग की जान चली गई।
- ढकोली क्षेत्र की एमएस एनक्लेव में पशु की टक्कर से मां-बेटी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
- बलटाना की मुख्य मार्केट में भी पशु की चपेट में आने से एक व्यक्ति घायल हो गया।

नगर परिषद पशुओं को पकड़ कर गोशाला भिजवा रही है। गोशाला में पशुओं को रखने के लिए नगर परिषद प्रति पशु 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से करीब तीन लाख रुपये प्रतिमाह खर्च कर रही है। पशुओं को लालड़ू की गोशाला में भेजा जाता है। वहां प्रति पशु 61 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 60 प्रतिशत खर्च नगर परिषद जीरकपुर और 40 प्रतिशत खर्च नगर परिषद डेराबस्सी वहन करती है। - परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जीरकपुर
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