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आरोपी भाग जाएगा पाकिस्तान, अदालत ने खारिज की जमानत याचिका

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मोहाली। जालंधर के मकसूदां थाने पर 2018 में हुए आतंकी हमले के आरोपी आमिर नाजिर मीर की जमानत याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने दूसरी बार आरोपी की जमानत याचिका खारिज की है। आरोपी पर हैंड ग्रेनेड से हमला करने वाले मुख्य आरोपियों को हैंड ग्रेनेड सप्लाई करने का आरोप है।
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जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी आमिर नाजिर मीर के वकील ने दलील दी कि उसे केस में गलत फंसाया गया है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं है और न ही आरोपी से पुलिस ने कोई बरामदगी दिखाई है। आरोपी घटनास्थल पर भी नहीं था। वह परिवार के साथ घर पर ही था। इस पर जवाब देते हुए एनआईए के वकील ने कहा कि आरोपी पहले भी दोनों मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर जमानत याचिका लगा चुका है, जिसे अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था।
आरोपी के खिलाफ अगस्त 2019 में एनआईए ने एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दाखिल की थी। जिसमें लिखा है कि आरोपी के तार पाकिस्तान तक जुड़े हैं। यदि इसे जमानत दी जाती है तो पाकिस्तान भाग सकता है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एनआईए की विशेष अदालत ने टिप्पणी की कि पिछली बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद से अब तक हालात में कोई बदलाव नहीं हुए हैं। इस कारण जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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थाने पर 14 सितंबर 2018 को 4 हैंड ग्रेनेड से हमला हुआ था
जालंधर के मकसूदां थाने पर 14 सितंबर 2018 को 4 हैंड ग्रेनेड से हमला हुआ था। जिसमें थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर रमनदीप सिंह के बयान पर 15 सितंबर 2018 को जालंधर के डिवीजन नंबर एक पुलिस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच दिसंबर माह में केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए को सौंपी थी। एनआईए ने एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाले 2 छात्र फाजिल बशीर पिंकू एवं शाहिद कयूम को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला था कि यह हमला अंसार गजवा-तुल-हिंद नामक संगठन के सरगना जाकिर रसीद उर्फ जाकिर मूसा के नेतृत्व में किया गया था। जिसमें हमलावरों को हथियार आमिर नाजिर नामक व्यक्ति ने उपलब्ध कराए थे।
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