फार्मास्युटिकल फैक्टरी में आग से मरने वालों की पहचान वेरका के गुरभेज सिंह (25), कुलविंदर सिंह (17) निवासी मजीठा, रानी (22) निवासी डेरा बाबा नानक (गुरदासपुर) और सुखदीप सिंह (27) निवासी पारथवाल बटाला के रूप में हुई है। नागकलां निवासी निंदर कौर ने बताया कि उनकी बेटी रानी तीन-चार महीने पहले ही यहां काम पर लगी थी, जो रोजाना शाम छह बजे घर पहुंच जाती थी लेकिन अब उसकी बेटी कभी भी घर नहीं लौटेगी।
वहीं मजीठा निवासी राज कौर ने बताया कि उनका बेटा कुलविंदर सिंह (17) फैक्टरी में काम करता था और रोजाना ही शाम छह बजे घर लौट आता था। जब उसका बेटा घर नहीं पहुंचा और फैक्टरी में आग लगने की सूचना पाकर वह मौके पर पहुंचे तो पता चला कि उसका बेटा फैक्टरी के अंदर फंसा हुआ है, जिसकी बाद में मौत हो गई।
कैसे लगी आग, नहीं चला पता
जिले के फायर अधिकारी दिलबाग सिंह ने बताया कि जानकारी मिलने के तुरंत बाद ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची गई थीं। फैक्टरी में धुआं बहुत ज्यादा था तो फायर कर्मियों को आग पर काबू पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। फैक्टरी के अंदर केमिकल के ड्रम पड़े थे, जिनमें लगातार विस्फोट हो रहे थे। एयरफोर्स की गाड़ियों की मदद से रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका। फिलहाल आग लगने का कारणों का पता नहीं चल पाया लेकिन जांच शुरू कर दी गई है।
मृतकों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। पुलिस मामले में जांच कर रही है और फैक्टरी में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला जाएगा।
- कंवलप्रीत सिंह, डीएसपी।
फैक्टरी मालिक प्रत्येक पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये देने पर हुआ राजी
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद क्वालिटी फैक्टरी मालिक प्रत्येक पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये देने पर सहमत हो गए हैं। मृतकों के वारिसों ने फैक्टरी मालिकों के खिलाफ रोष जताया और कहा कि अगर समय रहते फैक्टरी का निरीक्षण किया गया होता तो उनके परिवार के सदस्यों की मौत नहीं होती। इन परिवारों ने मजीठा थाने के बाहर प्रदर्शन किया और फैक्टरी मालिक से 15 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। मामले में तहसीलदार रतनजीत खुल्लर, एसएचओ बलविंदर सिंह भुल्लर ने हस्तक्षेप किया। इस पर फैक्टरी मालिक प्रत्येक पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये देने पर सहमत हो गया।