फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बादल का हमला: आप ने पार्टी प्रचार के लिए सरकारी खजाने से खर्च किए 700 करोड़, किसानों को नहीं दिया मुआवजा

Thu, 29 Sep 2022 10:34 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना

सार

सुखबीर बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री सत्ता के नशे में चूर हैं। मान ने अपने सुरक्षा के काफिले में 42 वाहन आवंटित किए हैं और जहां भी वह जाते हैं हर जगह कर्फ्यू लागू कर दिया जाता है। इतनी सुरक्षा किसलिए। 
विज्ञापन
सुखबीर सिंह बादल। - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने अपनी पार्टी के प्रचार के लिए 700 करोड़ आवंटित कर दिए, लेकिन किसानों के मुआवजा देना उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि गुजरात, हिमाचल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में आप के एजेंडे का आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि आप के गठन के लिए धन बर्बाद किया जा रहा है, लेकिन किसानों को फसल क्षति के लिए मुआवजा या धान की सीधी बुवाई के लिए 1500 रुपये प्रति एकड़ और पराली न जलाने के लिए 2500 रुपये प्रति एकड़ का भुगतान नहीं किया गया है। इस दौरान सुखबीर ने पीएम से राजोआना की फांसी की सजा माफ कर उम्रकैद में बदलने की मांग की।

सुखबीर वीरवार को गुरु दुख निवारण साहिब में आए हुए थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में सुखबीर बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री सत्ता के नशे में चूर हैं। मान ने अपने सुरक्षा के काफिले में 42 वाहन आवंटित किए हैं और जहां भी वह जाते हैं हर जगह कर्फ्यू लागू कर दिया जाता है। इतनी सुरक्षा किसलिए। जनता से किए सभी वादों को भुला दिया है, क्योंकि सरकार आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मर्जी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की साख और प्रतिष्ठा को उस समय बड़ा झटका लगा जब वह यह झूठा दावा करते हुए पकड़े गए कि बीएमडब्ल्यू पंजाब में कार निर्माण संयंत्र स्थापित करेगी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि राज्य में डेयरी किसानों और डेयरी आंदोलन की पीठ में भी छुरा घोंपा गया है, क्योंकि सरकार ने लंपी की बीमारी से दुधारू पशुओं के हो रहे नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आटा-दाल योजना को रोकने के लिए आप सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है, क्योंकि वह राजनीतिक लाभ लेने के लिए वितरण के तरीके को बदलना चाहती है। उन्होंने कहा कि रेत और बजरी की ऊंची कीमतों के कारण निर्माण गतिविधियां ठप हो गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें