माछीवाड़ा (लुधियाना)। एक ओर प्रदेश सरकार राज्य में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने का प्रयास कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर कई प्राइमरी स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ब्लाक के कुल 88 प्राइमरी स्कूलों में से 75 पंचायत विभाग के अधीन हैं। इनमें से भी 16 स्कूलों में अस्थायी शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इससे समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो रहा है। सरकार की इस बेरूखी का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं। न तो उनको स्तरीय शिक्षा मिल पा रही है और न ही माहौल।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के गांव बुर्जपवात के स्कूल में 85 बच्चों के लिए एक टीचर, गांव रतीपुर में 154 बच्चों के लिये दो टीचर, गढ़ी तरखाना के स्कूल नंबरर दो में 117 बच्चों के लिए दो टीचर, गांव ईराक में 101बच्चों के लिए दो टीचर, हसनपुर गांव के स्कूल में 121 बच्चों के लिए दो टीचर तक्तकरां गांव के स्कूल में 87 बच्चों के लिए दो टीचर ही नियुक्त हैं। स्कूल के इन अध्यापकों पर कार्यालय के कामकाज और मिड डे मील बनवाने की जिम्मेदारी भी है।
इसके अलावा ब्लाक के 16 स्कूलों दुपाणा धुलेवाल, हयात पुरा, काऊंके, खेड़ा लोहारियां, मंड खान पुर, राजेवाल, रोड माजरी, सेसोवाल, सिंकदरपुर, रोड माजरी, मंड सुखेवाल, टाडा दकुशल, गढ़ी सैनियां गावों के स्कूलों में कोई स्थायी शिक्षक ही नहीं है। ब्लाक में शिक्षकों की 160 में से 62 पद खाली हैं।
ब्लाक के सभी स्कूलों में तीन हजार छात्रों पर कुल 98 टीचर ही नियुक्त हैं। राज्य के गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा देने वाले इन सरकारी स्कूलों की कोई सुध नहीं ले रहा है । गरीबों का हितैषी होने का दम भरने वाले राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस व अकाली भाजपा गठबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं ले रही। ब्लाक और पंचायत अधिकारी तेजिदर सिंह ने शिक्षकों की संख्या कम होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस संबंधी उच्चाधिकारियों को पहले से ही सूचित कर दिया है।