पुल के नीचे खड़े स्थानीय अधिकारियों ने नाबालिग को काफी समझाया, लेकिन वह पुल से नीचे उतरने को तैयार नहीं हुई। जीआरपी और टिकट चेकरों ने सीढ़ी लगाकर लड़की को नीचे उतारने के लिए हाथ आगे बढ़ाए तो वह और आगे की तरफ खिसक गई। वह पुल से गिरकर चोटिल न हो जाए, इससे बचने के लिए पुल के नीचे गद्दे बिछा दिए गए।
लुधियाना स्टेशन पर एक नाबालिग लड़की ट्रेन के आगे कूदने के लिए फुटओवर ब्रिज पर चढ़ गई और पुल की रेलिंग पार करके नीचे गर्डर पर जाकर छिप गई थी। वह ट्रेन आने का इंतजार कर रही थी कि तभी उसपर यात्रियों की नजर पड़ गई। नाबालिग को फुटओवर ब्रिज के नीचे छिपी देख यात्रियों ने शोर मचा दिया। रेल कर्मियों ने तत्परता दिखाकर उसे बचा लिया था। फिरोजपुर रेलवे डिवीजन ने नाबालिग की जान बचाने वाले रेल कर्मियों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया है।
विज्ञापन
नाबालिग लड़की के फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने की खबर सुन देखते ही देखते प्लेटफाॅर्म पर यात्रियों की भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पाकर जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद नाबालिगा को पुल से नीचे उतारने की कोशिशें शुरू हुई। एहतियात के तौर पर ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रीसिटी) की पावर सप्लाई बंद कर दी गई और प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर ट्रेनों को आवाजाही को रोक दिया गया। किसी भी किस्म की आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम भी बुलाई गई।
पुल के नीचे खड़े स्थानीय अधिकारियों ने नाबालिग को काफी समझाया, लेकिन वह पुल से नीचे उतरने को तैयार नहीं हुई। जीआरपी और टिकट चेकरों ने सीढ़ी लगाकर लड़की को नीचे उतारने के लिए हाथ आगे बढ़ाए तो वह और आगे की तरफ खिसक गई। वह पुल से गिरकर चोटिल न हो जाए, इससे बचने के लिए पुल के नीचे गद्दे बिछा दिए गए। अभी नाबालिग को नीचे उतारने की कोशिशें चल ही रहीं थी कि वह पुल के नीचे गर्डर पर बैठे-बैठे बेसुध हो गई।
रेलवे कर्मियों ने तुरंत मोटे कपड़े की तिरपाल मंगवाई और तिरपाल खोलकर पुल के नीचे खड़े हो गए। इसके बाद जीआरपी और आरपीएफ ने पुल के नीचे डबल सीढ़ी लगाई और बेसुध पड़ी नाबालिग की कमर पर रस्सी बांधकर उसे पुल से ऊपर खींच लिया। इस तरह से करीब एक घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर नाबालिग को पुल से नीचे उतारने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया। सिविल अस्पताल पहुंची नाबालिग की मां सुनीता ने बताया कि वह अपनी बेटी और 3 बेटों के साथ एक महीना पहले बिहार से लुधियाना आई थी। वहीं, कुछ यात्रियों का कहना था कि पुल पर सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद जीआरपी या आरपीएफ को इसकी भनक नहीं लग पाई। अगर यात्री शोर न मचाते तो नाबालिग की जान जा सकती थी।