सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। एईटीसी (अस्सिटेंट एक्साइज एंड टेक्सेशन कमिश्नर) की ओर से नगर काउंसिल की हद के बाहर स्थापित जिले भर के उद्योगों को इंस्टीट्यूशनल टैक्स भरने का नोटिस जारी करने से उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है। उद्यमियों का कहना है कि इसमें जिस एक्ट का हवाला दिया गया है वह अकाली भाजपा सरकार ने बनाया था। उस समय अकाली भाजपा सरकार ने इसको वापस लेने का वायदा किया था। कांग्रेस ने इसका विरोध किया था।
कांग्रेस ने सत्ता में आने पर इस टैक्स एक्ट को लागू नहीं करने का भरोसा भी दिलाया था। अब दस साल बाद इस टैक्स की वसूली के लिए जारी नोटिस से उद्योगपतियों में आक्रोश है। जिला इंडस्ट्री चैंबर के अध्यक्ष घनश्याम कांसल, चेयरमैन डॉ. एआर शर्मा, वित्त सचिव एमपी सिंह ने कहा कि उक्त कदम सरासर इंडस्ट्री विरोधी है। इसके साथ उद्योगपतियों से किए वायदों से पीछे हटने के समान है।
उद्योगपतियों ने कहा कि इस मामले में लाकडाउन की वजह से उद्योग पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस मामले को लेकर जल्द ही सभी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलेंगे। उन्होंने मांग की कि उद्योगपतियों पर कई टैक्सों के नाम पर आर्थिक बोझ डालने की नीति को बंद करे। पंजाब की इंडस्ट्री तो पहले से ही अन्य प्रदेशों में शिफ्ट हो रही है और यदि सरकार ने ऐसी नीतियों को आगे बढाया तो पूरे उद्योग ही यहां से पलायन करने को विवश हो जाएंगे। इस मामले को लेकर उद्योगपतियों ने एईटीसी संदीप गुप्ता से मुलाकात की। उन्होंने इस टैक्स के प्रति अपनी दिक्कत बताई। एईटीसी गुप्ता ने कहा कि उद्योगपतियों की भावनाओं की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। इस मौके पर इटीओ रोहित अग्रवाल, राजीव बांसल मक्खन, भारत भूषण गर्ग, संदीप बांसल मौजूद रहे।
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