गौरतलब है कि 20 नवंबर 2017 को भी सोमवार था, जिस दिन सूफिया चौक पर स्थित प्लास्टिक फैक्टरी में सुबह सात बजे आग लगी थी। आग इतनी भयानक थी कि सुबह लगभग 10 बजे तक 25 दमकल गाड़ियों ने आग पर काबू पाया था। लगभग 11 बजे फैक्टरी में रखे केमिकल ड्रम में अचानक जोरदार धमाका हुआ तो आग फिर से भड़क गई। इसके कुछ अंतराल के बाद तीन धमाके हुए और पांच मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई। उस समय फैक्टरी में आग बुझा रहे दमकल विभाग के नौ मुलाजिम, फैक्टरी में काम कर रहे सात मजदूर और लगभग 30 अन्य लोग नीचे दब गए थे।
किसी तरह 30 लोगों को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया था लेकिन 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस बिल्डिंग के संबंध में भी निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं था। सोमवार को मुकंद नगर में गिरी इमारत में जैक लगाकर कैसे काम किया जा रहा था, इसकी भनक निगम को नहीं लगी। जब घटना हो गई उसके बाद निगम अफसर पहुंचे। इस बार भी दामन बचाते हुए कहा गया कि अगर नई बिल्डिंग बन रही होती तो निगम कोई कार्रवाई करता। जैक लगाकर काम करने पर वह क्या कार्रवाई करते।
मैंने खुद जायजा लिया है, जैक लगाकर लेंटर को उठाने का काम चल रहा था। इस दौरान यह हादसा हुआ है। यहां कोई नई इमारत नहीं बन रही थी, इसलिए निगम को इस मामले की पहले जानकारी नहीं मिली है। जैक लगाकर लेंटर उठाने के मामले को निगम के जनरल हाउस में रखा जाएगा। इसमें प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास भेजा जाएगा कि वह ऐसे कार्यों पर रोक लगाए, ताकी भविष्य में ऐसे हादसे न हो सकें। - बलकार संधू, मेयर लुधियाना।