महिला को सीएमसी अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी गई। उमा देवी व उनका पति सीएमसी जाने के लिए अस्पताल के बाहर आ गए। उसका पति निजी एंबुलेंस का इंतजाम करने के लिए बाहर चला गया। उमा देवी अस्पताल के पार्क में आकर बैठ गई। उसी समय उसे प्रसव पीड़ा होने लगे।
उससे चिल्लाने की आवाज सुनते वहां मौजूद कुछ महिलाएं उसके आसपास खड़ी हो गई। पार्क में उमा देवी ने दो बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उसे उठाकर अस्पताल के अंदर लेकर गए। स्वास्थ्य विभाग ने नवजात बच्चों का वजन कम होने के चलते पीजीआई रेफर कर दिया है।
तीन एंबुलेंस के लिए नौ के बजाय तीन ड्राइवर
सिविल अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस चलाने के लिए सिर्फ तीन ड्राइवर हैं।नियम के मुताबिक एंबुलेंस को चलाने के लिए नौ ड्राइवर की जरूरत है। एक ड्राइवर आठ घंटे की शिफ्ट में काम करता है, इसके बाद दूसरे चालक की तैनाती होती है।
स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद तीन ड्राइवरों में एक ड्राइवर सिविल अस्पताल के अन्य काम में व्यस्त रहता है। उसकी जिम्मेदारी अस्पताल के स्टाफ को लाने और ले जाने की होती है। ऐसे में आम लोगों की सुविधा के लिए सिर्फ दो ड्राइवर ही बचते हैं।
यह मामला देर रात मेरे ध्यान में लाया गया था। मैंने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए है। पीड़िता को शिकायत होने के कारण इको कार्डिकग्राफी के लिए सीएमसी जाने को कहा गया था। यह सुविधा सिविल अस्पताल में सिर्फ दो दिन ही उपलब्ध होती है। उसे सीएमसी ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम किया जा रहा था। वह पार्क में चली गई और वहीं डिलीवरी हो गई। - हतिंदर कौर, एसएमओ जच्चा-बच्चा अस्पताल लुधियाना।