फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

व्यवस्था पर सवाल : सरकारी अस्पताल में नहीं मिली एंबुलेंस, गर्भवती ने पार्क में दो बच्चों को दिया जन्म

Fri, 19 Feb 2021 06:19 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

पंजाब के लुधियाना में गर्भवती को सीने में दर्द होने के बाद सिविल अस्पताल ने जांच के लिए दूसरे अस्पताल जाने कहा। लेकिन अस्पताल ने कोई एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई। पति के साथ दूसरे अस्पताल जाने को निकली गर्भवती ने पार्क में दो बच्चों को जन्म दिया। 

विज्ञापन


मामले का पता लगते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में पहले महिला और बच्चों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करने की बात कह दी। हालांकि बाद में देर रात सिर्फ नवजातों को पीजीआई भेजा गया। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हैं। महिला इस समय जच्चा-बच्चा अस्पताल में भर्ती है।

लुधियाना के धूरी लाइन निवासी उमा देवी (30) गर्भवती थी। 17 फरवरी को उन्हें जच्चा-बच्चा अस्पताल में भर्ती कराया गया। उमा देवी ने 18 फरवरी को छाती में दर्द होने की शिकायत की। इस पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने उन्हें इको कार्डिकग्रॉफी करवाने के लिए सीएमसी अस्पताल जाने को कहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

महिला को सीएमसी अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी गई। उमा देवी व उनका पति सीएमसी जाने के लिए अस्पताल के बाहर आ गए। उसका पति निजी एंबुलेंस का इंतजाम करने के लिए बाहर चला गया। उमा देवी अस्पताल के पार्क में आकर बैठ गई। उसी समय उसे प्रसव पीड़ा होने लगे।

उससे चिल्लाने की आवाज सुनते वहां मौजूद कुछ महिलाएं उसके आसपास खड़ी हो गई। पार्क में उमा देवी ने दो बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उसे उठाकर अस्पताल के अंदर लेकर गए। स्वास्थ्य विभाग ने नवजात बच्चों का वजन कम होने के चलते पीजीआई रेफर कर दिया है।

तीन एंबुलेंस के लिए नौ के बजाय तीन ड्राइवर
सिविल अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस चलाने के लिए सिर्फ तीन ड्राइवर हैं।नियम के मुताबिक एंबुलेंस को चलाने के लिए नौ ड्राइवर की जरूरत है। एक ड्राइवर आठ घंटे की शिफ्ट में काम करता है, इसके बाद दूसरे चालक की तैनाती होती है।

स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद तीन ड्राइवरों में एक ड्राइवर सिविल अस्पताल के अन्य काम में व्यस्त रहता है। उसकी जिम्मेदारी अस्पताल के स्टाफ को लाने और ले जाने की होती है। ऐसे में आम लोगों की सुविधा के लिए सिर्फ दो ड्राइवर ही बचते हैं।

यह मामला देर रात मेरे ध्यान में लाया गया था। मैंने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए है। पीड़िता को शिकायत होने के कारण इको कार्डिकग्राफी के लिए सीएमसी जाने को कहा गया था। यह सुविधा सिविल अस्पताल में सिर्फ दो दिन ही उपलब्ध होती है। उसे सीएमसी ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम किया जा रहा था। वह पार्क में चली गई और वहीं डिलीवरी हो गई। - हतिंदर कौर, एसएमओ जच्चा-बच्चा अस्पताल लुधियाना।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें