लुधियाना। गमसा की ओर से बहादुर के रोड नजदीक दाना मंडी में चल रहे एक्सपो-2022 के दूसरे दिन बड़ी तादाद में लोग प्रदर्शनी देखने पहुंचे। प्रदर्शनी के दूसरे दिन कारोबारी व उद्यमियों ने होजरी की मशीनें देखीं और ऑर्डर भी बुक कराए। ये मशीनें कम बजट की हैं और नया रोजगार शुरू करने के लिए सहायक हैं। इस प्रदर्शनी में अधिकतर कपड़ा बनाने की मशीनें चर्चा में रहीं।
खास बात यह रही कि एक्सपो में जहां बड़े कारोबारियों के लिए हाईटेक मशीनें प्रदर्शित की गई हैं। दूसरी ओर बेरोजगार युवक और होजरी का काम करने के इच्छुक लोगों के लिए कम बजट वाली मशीनें उतारी गई हैं। इनमें टोपी, टी शर्ट, कमीज, पजामा पर सुंदरता और आकर्षण बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले स्टीकर की मशीन आकर्षण का केंद्र रही।
कैप मशीन के जरिये कम बजट में काम की शुरुआत
मीन हुई कंपनी की कैप मशीन सर्दी में उपयोग की जाने वाली कई डिजाइन की टोपियां बनाती है। कंप्यूटराइज्ड मशीन होने के कारण टोपी का आकर्षण बढ़ाने के लिए कोई भी डिजाइन डाला जा सकता है। इससे पहले डेलदार मशीन होती थी, इसमें डिजाइन नहीं डाला जा सकता था। यह साधारण सिंपल टोपियां बनती थी। डिजाइन बनाने के लिए काफी समय लगता था, लेकिन अब समय भी बचता है और लेबर कॉस्ट भी कम होती है। यह मशीन 24 घंटे में 600 टोपी तैयार करती है। मशीन के सॉफ्टवेयर को सेट कर देने के बाद यह अपने आप टोपी बनाती रहती है। बिजली की खपत भी कम होती है। मशीन निर्माता ने बताया कि इस मशीन के जरिये बेरोजगार युवक अपना काम शुरू कर सकते हैं काम सीखने के लिए वेट ट्रेनिंग भी दे रहे है। खास यह है कि इस काम को सीखने में ज्यादा समय भी नहीं लगता है व्यक्ति अपना रोजगार शुरू कर सकता है।
सीक्वेंस पंचिंग मशीन बनाती है स्टीकर
सीक्वेंस पंचिंग मशीन के जरिये स्टीकर बनाए जाते हैं। ये स्टिकर टीशर्ट को आकर्षित बनाने के लिए बनाए जाते हुए। मशीन कंप्यूटराइज्ड है। एक घंटे में 15 पीस तैयार करती है। चूंकि बच्चों के कपड़े हों या लेडीज कपड़े अथवा टीशर्ट हो। उन पर स्टिकर का उपयोग अधिक होता है। इसलिए मशीन कारोबार के लिए उपयोगी है। बिजनेस में आने के इच्छुक युवा इस मशीन को खरीदकर अपना काम शुरू कर सकते हैं। मशीन छह लाख रुपये की है। इसमें 20 रुपये की कॉस्ट में बनने वाली टोपी 80 में बिकती है।
पानी की खपत कम करेगी डाइंग हाई टेंपरेचर मशीन
पानी बचाने के लिए डाइंग हाई टेंपरेचर मशीन बड़ी कारगर है। डाइंग इंडस्ट्री के लिए यह मशीन आने वाले दिनों में काफी उपयोगी साबित होगी। क्योंकि अभी पानी अधिक उपयोग किया जाता है। पहले डाइंग में तैयार कपड़े की वाशिंग के लिए जहां एक किलो कपड़े को धोने के लिए 10 लीटर पानी की जरूरत होती थी। अब सिर्फ 4 लीटर पानी की जरूरत होगी। इस तरह से यह मशीन पानी की बचत के मामले में बहुत उपयोगी है। इसे लुधियाना की कंपनी ने बनाया है। यह मशीन इको फ्रेंडली है। पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। खास बात यह है कि डाइंग इंडस्ट्री में 10 मशीनें लगी हों तो सिर्फ एक कारीगर ही सभी मशीनों को ऑपरेट कर सकता है। ये कंप्यूटराइज्ड मशीनें हैं। इस तरह से लेबर कॉस्ट भी कम होगी। पर्यावरण भी बेहतर रहेगा, पानी बचेगा, यह मशीन 28 से लेकर 35 लाख के बीच में है। इसमें कंप्यूटरीकृत और मैनुअली भी चलाई जाने वाली मशीनें हैं। यह बिजली की खपत भी कम करती है।
पांच टन कपड़ा पांच घंटे में प्रेस कर देगी कंबेक्टर मशीन
डाइंग और कपड़ा उद्योग के लिए कंबेक्टर मशीन उपयोगी मानी जा रही है। यह मशीन पांच टन कपड़े को 5 घंटे में प्रेस कर देगी। किसी भी तरह की सिकुड़न कपड़े में नहीं रह जाएगी। यह मशीन कॉटन के कपड़े को प्रेस करती है और इसकी कीमत 45 लाख रुपये है।
24 घंटे में पांच टन कपड़ा बनाती है निटिंग मशीन
प्रदर्शनी में टाइफन सर्कुलर निटिंग मशीन को भी रखा गया है। इंटरलॉक की आधुनिक डबल जर्सी मशीन है। यह मशीन 24 घंटे में पांच टन कपड़ा तैयार करती है। इससे पहले की मशीनें सौ से डेढ़ सौ किलो ही कपड़ा तैयार करती थी। अब रफ्तार का जमाना है तो यह मशीन कम समय में ज्यादा कपड़े तैयार करती है। यह मशीन कंप्यूटराइज्ड है और 22 लाख के करीब इसकी कीमत है। इस तरह की यूरोप कंट्री से आने वाली मशीन करीब 50 लाख में पड़ती है। इसमें कैनवस, चेक, डिजाइन भी बनते हैं। मशीन में लो कार्बन, कम ध्वनि, और हाई स्पीड इसकी महत्वपूर्ण क्वालिटी है।
प्रदर्शनी में लगी मशीन।- फोटो : ?