लुधियाना। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को लेकर कारोबारियों में दहशत की स्थिति बन चुकी है। बीते पांच माह के दौरान स्टील, एलुमीनियम और प्लास्टिक के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इस मुद्दे को लेकर शनिवार चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंगस (सीआईसीयू) ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि सरकार ने कच्चे माल के बढ़ते दामों पर लगाम नहीं लगाई तो देश भर में भारी संख्या में एमएसएमई बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगी। कच्चे माल की कीमत पर लगाम कसने के लिए सरकार को तुरंत प्रभावी के कदम उठाने चाहिए।
सीआईसीयू अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने बताया कि इंजीनियरिंग इंडस्ट्री में स्टील एक अहम हिस्सा है। स्टील से मोटर वाहन, ट्रैक्टर पार्ट्स और हैंड टूल का निर्माण किया जाता है। बीते पांच में सीआरसी स्टील का दाम 42 से 65 रुपये किलो और एचआरसी शीट का दाम 36 से 56 रुपये प्रति किलो बढ़ चुका है। वहीं रिलोड स्टीम के दाम में 10 रुपये प्रति किलो व प्लास्टिक के दाम में 15 रुपये प्रति किलो इजाफा हो चुका है। इस समय बड़ी स्टील रोलिंग मिलें निर्यात को ज्यादा बढ़ावा दे रही हैं।
जनवरी और फरवरी में 10 हजार टन एचआरसी यूरोप भेजा जाएगा, जबकि एक अन्य रोलिंग मिल की तरफ से मिडल ईस्ट एरिया के लिए 30 हजार टन एचआरसी स्टील भेजने की बुकिंग की है। उनकी सरकार से मांग है कि स्टील के दाम को काबू करने के लिए अगले छह माह तक निर्यात पर तुरंत पाबंदी लगाई जाए। स्टील के आयत को ड्यूटी फ्री कर देना चाहिए।
महासचिव पंकज शर्मा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से कारोबारियों में हड़कंप का माहौल है। बीते कुछ माह से दौरान स्टील के दाम 32 फीसदी, एल्युमीनियम के 26 फीसदी, प्राकृतिक रबड़ के 52 फीसदी, तांबे के दाम 77 फीसदी बढ़ चुके हैं। जिस हिसाब से रेट बढ़ चुके है, कारोबारियों को अपने ऑर्डर पूरे करने में भारी परेशानी हो रही है। यह छोटे सेक्टर के लिए किसी संकट से कम नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
एससी रलहन ने बताया कि विश्व में स्टील के दाम बढ़े है, अन्य देशों में जहां स्टील के दामों में 25 फीसदी इजाफा हुआ तो भारत में 42 फीसदी तक रेट बढ़े है। ऐसे में उनके ऑर्डर रद्द होना शुरू हो चुके हैं, क्योंकि अन्य देशों की तुलना में हमारे उत्पाद महंगे पड़ रहे है। इस मौके पर एवन साइकिल के एमडी अवतार सिंह पाहवा, अमरीक सिंह, रजनीश आहूजा, अमरजीत सिंह, ओपी बस्सी मौजूद थे।