लुधियाना में कृषि कानूनों की वापसी के फैसले का स्वागत करते किसान।
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गुरुपर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा का पंजाब के कारोबारियों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि जैसे प्रधानमंत्री ने बड़ा फैसला लिया है उसी क्रम में अब किसान नेता भी आंदोलन खत्म करने की तरफ बढ़ें। इससे पंजाब की इंडस्ट्री को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। किसान आंदोलन के चलते उनके ट्रांसपोर्ट के खर्च में 15 फीसदी तक इजाफा हो चुका है। वहीं बंद के चलते उनको अलग से मार झेलनी पड़ रही थी। अब किसान नेता राजनीतिक पार्टियों के बहकावे में न आकर आंदोलन को खत्म करने की तरफ काम करें। इससे पंजाब में नए निवेशक सामने आएंगे, वहीं पुरानी इंडस्ट्री भी अपने कारोबार को बढ़ाने की तरफ से ध्यान देगी।
गौरतलब है कि किसान आंदोलन के चलते पंजाब की इंडस्ट्री को सबसे बड़ा घाटा झेलना पड़ा है क्योंकि पहले रेल यातायात को ठप कर दिया गया था। इससे कारोबारी अपने आर्डर निर्यात नहीं कर पा रहे थे। कई कारोबारियों के विदेशों से आर्डर रद्द तक हो गए थे। इसके अलावा आए दिन बंद के चलते भी कारोबारियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। अब दिल्ली बार्डर पर धरना होने के चलते कारोबारियों का माल सीधे अन्य प्रदेशों में नहीं जा रहा था। ऐसे में उनका ट्रांसपोर्ट खर्च 15 फीसदी तक बढ़ चुका था। अब कानून वापस होने की खबर से कारोबारियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। उनका मानना है कि इससे पंजाब के कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
किसी बहकावे में न आए अब किसान
गुरुपर्व के मौके पीएम ने एक अच्छा फैसला लिया है, लेकिन मैं सुबह से देख रहा हूं कि कुछ राजनीतिक दल इसमें कुछ तूल देने का प्रयास कर रहे हैं। किसान नेताओं को चाहिए कि अगर सरकार ने एक कदम बढ़ाया है तो वह चार कदम आगे बढ़ें। आंदोलन खत्म होने से कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि दिल्ली बार्डर बंद होने के चलते उन्हें 15 फीसदी तक अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट चार्ज देने पड़ रहे हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों से ग्राहकों का आना भी कम हो गया था।
- डीएस चावला, प्रधान युनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
पंजाब में उत्पादों की बढ़ेगी मांग
किसान आंदोलन के चलते पंजाब में इस समय उत्पादों की मांग कम हो गई थी, क्योंकि किसानों का इस समय ध्यान अपने आंदोलन पर था। इसलिए बाजार में खरीदारी कम ही हो रही थी। आंदोलन खत्म होने के बाद कारोबार में मांग बढ़ेगी। वहीं आंदोलन के समाप्त होने के बाद सभी रास्ते खुल जाएंगे। इससे ट्रांसपोर्ट में सबसे बड़ी राहत मिलेगी। यह आंदोलन ज्यादा पंजाब से संबंधित था, इसलिए बाहरी निवेशक यहां आने से कतरा रहे थे। अब दोबारा नए निवेशक यहां आएंगे और पुराने निवेशक भी अपने कारोबार में कुछ विस्तार करेंगे।
- बदीश जिंदल, राष्ट्रीय प्रधान आल इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम
अनिश्चितता के माहौल पर लगेगा विराम
किसान आंदोलन के कारण पंजाब में अनिश्चितता का माहौल बन चुका था, इसलिए अन्य राज्यों से कारोबारी यहां आने से कतरा रहे थे। खुद कारोबारियों को पता नहीं था कि आगे क्या होगा। कारोबारी खुद इतने परेशान हो चुके थे कि कुछ कारोबारी अपना काम समेटने की सोच रहे थे, क्योंकि एक साल से चल रहे आंदोलन के कारण उन्हें भविष्य साफ नजर नहीं आ रहा था। केंद्र सरकार के फैसले से कारोबारियों में खुशी है, हमें उम्मीद है आंदोलन जल्द खत्म होगा और दोबारा काम पटरी पर आ जाएगा।
- विनोद थापर, प्रधान निटवियर क्लब लुधियाना