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टिकट दो रुपये की, मोहर लगाकर वसूले तीस रुपये, यह टिकट लगभग पंद्रह साल पूर्व हो चुकी है बंद

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फिरोजपुर। रेलवे ने लोगों की सुविधा के लिए बैसाखी पर्व पर फिरोजपुर-हुसैनीवाला बार्डर के बीच ट्रेन चलाई है। इस ट्रेन में सफर करने वाले लोगों से रेलवे ने लगभग पंद्रह साल पहले बंद हो चुकी पुरानी टिकट जिस पर दो रुपये किराया लिखा है, उस पर मोहर लगाकर तीस रुपये वसूले हैं। नियमों के मुताबिक उक्त टिकट पर तीस रुपये किराया नहीं वसूल सकते हैं।
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जबकि टिकट पर दो रुपये लिखा हुआ है। ट्रेन में सफर करने वाले लोगों ने टिकट पर दो रुपये लिखा देख और तीस रुपये किराया वसूलने पर हैरानी जताई है। उधर, रेल डिवीजन फिरोजपुर के सीनियर डिवीजनल कामर्शियल मैनेजर सुदीप सिंह का कहना है कि बैसाखी मेले की उनके पास पुरानी टिकटें पड़ी थी। उस पर मोहर लगाकर नियम मुताबिक तीस रुपये वसूले हैं।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक रेलवे में कंप्यूटर टिकट देने की शुरुआत के बाद पुरानी टिकटें बंद हो चुकी हैं। यही नहीं लखनऊ में इन टिकटों की प्रिंटिंग होती थी वो मशीन भी बंद हो चुकी है। जानकारों के मुताबिक दिल्ली हेडक्वार्टर से एक पत्र जारी हुआ था कि जिन डिवीजनों के पास पुरानी टिकटें हैं उसे बंद करें। ट्रेन में सफर कर रहे लोगों का कहना है कि इंडियन रेलवे देश की सबसे बड़ी संस्था है।
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इसके अपने खुद के कानून व नियम है। इस प्रकार की टिकटों पर मोहर लगाकर पैसे वसूलना ठीक नहीं है। ऐसा करने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। रेलवे को चाहिए जिस तरह बसों में कंडक्टर के पास टिकट काटने के लिए छोटे कंप्यूटर होते हैं ऐसे टिकट निरीक्षकों को देना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि उनके साथ ठगी तो नहीं हो रही है। लोगों की रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि ये पुरानी टिकटें बंद करें और कंप्यूटर टिकट दें जिस पर किराया अंकित हो। साल में दो बार फिरोजपुर और हुसैनीवाला के बीच ट्रेन दौड़ती है 23 मार्च और बैसाखी पर्व पर।
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