राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल
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संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने किसानों की बात करते हुए पंजाब को फसली चक्र से बाहर निकालने का मुद्दा उठाया। राज्यसभा सदन में स्पेशल मेंशन (विशेष उल्लेख) के दौरान पंजाब के किसानों द्वारा हरी क्रांति के दौरान देश का पेट भरने की बात करते हुए संत सीचेवाल ने कहा कि पंजाब के मेहनतकश किसानों और मजदूरों ने देश के अन्न भंडारों को पूरी तरह से भर दिया था। वहीं, पंजाब इस समय हरी क्रांति की भारी कीमत चुका रहा है। पंजाब के खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने पंजाब के समृद्ध राज्य को कैंसर क्षेत्र में बदल दिया है।
संत सीचेवाल ने कहा कि पंजाब के किसान गेहूं और धान के फसली चक्र में फंसे हुए हैं। सरकार ने केंद्रीय अनाज भंडारण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नीति अपनाई और 1973 से धान की फसल पंजाब के किसानों पर थोप दी। अब हर साल पंजाब में धान का रकबा घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है, जिससे भूजल पर भी दबाव बढ़ रहा है और जल स्तर तेजी से घट रहा है। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के दौरान जहां विशाल जल भंडारण पर असर पड़ता है। वहीं बाद में धान की पराली को संभालना भी हर साल एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। इस धुएं के कारण होने वाले हादसों में हर साल कीमती जानें चली जाती हैं।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2039 तक भूमिगत जल 1000 फीट गहरा हो जाएगा, जिससे खेती करना असंभव हो जाएगा। धान की फसल पंजाब की जलवायु परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त नहीं है। धान की फसल के लिए पहले खेतों में पानी भरना होता है। जिसके कारण पंजाब के तीन चौथाई से अधिक ब्लॉकों में भूजल खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया। अब पंजाब फसल सिंचाई के लिए सबमर्सिबल मोटरों के बिना नहीं रह सकता। ये उपकरण किसानों के कर्ज का कारण बन गए हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब के किसानों और मजदूरों का कर्ज माफ किया जाए ताकि वे भी चैन की नींद सो सकें।