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Punjab: कनाडा में नौकरी खोज रहे पंजाबी छात्र, आधे दाम पर काम करने पर मजबूर, भारत में अभिभावक चिंतित

Wed, 26 Jul 2023 04:03 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

जालंधर के रोहित भोला का कहना है कि विद्यार्थी यहां से उम्मीद लेकर जाते हैं कि वह कनाडा पहुंचते ही तुरंत काम शुरू कर देंगे। प्रतिनिधि हमें यह भी आश्वासन देते हैं कि कनाडा में नौकरी के भरपूर अवसर मौजूद हैं और हम न केवल अपना खर्च निकाल लेंगे बल्कि घर पैसे भेजने में भी सक्षम होंगे। यह हकीकत नहीं है।
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canada - फोटो : social media
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विस्तार
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कनाडा में टोरंटो के निकट किचनर में स्टडी पूरी कर चुका छात्र योगेश नौकरी की तलाश कर रहा है, उसकी माता जालंधर कैंट एरिया में रहने वाली प्रिया काफी चिंतित है। जीआईसी खाते के पैसे खत्म हो चुके हैं ऊपर से भारतीय करंसी में प्रति माह 50 हजार किराया बेटा कैसे कनाडा में अदा करेगा, इसे लेकर मां चिंतित है। यह चिंता अकेली प्रिया की नहीं है बल्कि कई ऐसे अभिभावक हैं जो बच्चों को लेकर चिंतित हैं।

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72 हजार कमाई, 50 हजार किराया
ऊपर से कनाडा से लगातार वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें नौकरी की तलाश में भारतीय अंतरराष्ट्रीय छात्रों और स्नातकों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। कनाडा स्टडी वीजा पर गए प्रज्जवल मल्होत्रा ने कहा कि यहां हर चीज महंगी होती जा रही है, और छात्रों को भारत में अपने माता-पिता से अतिरिक्त वित्तीय सहायता मांगने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति हमें परेशान कर रही है। नौकरियां मिल नहीं रही हैं, जिस ट्रेड की स्टडी की है, उसकी तो दूर-दूर कर नौकरी नहीं है। हालात यह हैं कि आईटी का कोर्स कर छात्र टैक्सी चला रहे हैं या फिर किसी कैफे में नौकरी कर रहे हैं। दिक्कत एक नहीं बल्कि कई हैं, छात्र प्रति सप्ताह महज 20 घंटे काम कर सकते हैं। 15 डॉलर प्रति घंटा पगार है, यानी 300 डॉलर प्रति सप्ताह और 1200 डॉलर प्रति माह। यह भारतीय करंसी में महज 72 हजार है, जिसमें 50 हजार तो किराया ही है, ऊपर से सरकार का टैक्स। वर्क परमिट पर भी जॉब नहीं है, आधे दाम पर नकदी पर नौकरी करने के लिए युवा मजबूर हैं।

उच्च ट्यूशन फीस का भी बोझ
दरअसल, कनाडा जाने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को न केवल उच्च ट्यूशन फीस का बोझ उठाना पड़ता है - जो स्थानीय कनाडाई छात्रों द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि से पांच गुना अधिक है - बल्कि उन्हें अनिवार्य गारंटी निवेश प्रमाणपत्र में न्यूनतम दस हजार कनाडा डॉलर का निवेश भी करना पड़ता है, जिसकी समय के साथ धीरे-धीरे प्रतिपूर्ति की जाती है।
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जालंधर के रोहित भोला का कहना है कि विद्यार्थी यहां से उम्मीद लेकर जाते हैं कि वह कनाडा पहुंचते ही तुरंत काम शुरू कर देंगे। प्रतिनिधि हमें यह भी आश्वासन देते हैं कि कनाडा में नौकरी के भरपूर अवसर मौजूद हैं और हम न केवल अपना खर्च निकाल लेंगे बल्कि घर पैसे भेजने में भी सक्षम होंगे। यह हकीकत नहीं है। रोहित भोला का बेटा सिद्धार्थ भोला दिसंबर 2019 में कनाडा गया था। स्टडी तो 2021 में पूरी कर ली थी और उसने डिप्लोमा अकाउंट्स में किया था लेकिन उसको नौकरी नहीं मिली। नतीजन, एक स्टोर में नौकरी कर रहा है। नौकरियों की कमी के साथ-साथ आवास और भोजन की बढ़ती लागत ने स्थिति को और खराब कर दिया है। वहां मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ा रहे हैं, यहां तक कि अगर बढ़ी हुई रकम का भुगतान करने में विफल रहते हैं तो बेदखली की धमकी भी दे रहे हैं। 

कनाडा में एडमिंटन के रहने वाले परविंदर मोंटू जो इमिग्रेशन का बिजनेस करते हैं, के मुताबिक ब्रैम्पटन, ओंटारियो और सरे, ब्रिटिश कोलंबिया, आमतौर पर कनाडा में भारतीय प्रवासियों से जुड़े शहर हैं। उन्होंने फिल्मों, गीतों और साहित्य के माध्यम से पंजाबी चेतना में इतनी गहराई से प्रवेश किया है कि उन्हें पंजाब के विस्तार के साथ-साथ कनाडा का अभिन्न अंग माना जाता है। 

भारत खासकर पंजाब से आने वाले युवाओं के पास भाषा दक्षता और शिक्षा है, लेकिन उनकी साख को अक्सर कनाडा में मान्यता नहीं मिलती है, जिससे उन्हें कम वेतन वाली नौकरियां स्वीकार करनी पड़ती हैं। कनाडा में स्किल के बहुत अवसर हैं लेकिन छोटी नौकरियों की खासी कमी है। वहीं, कनाडा इमिग्रेशन के एक्सपर्ट सुकांत का कहना है कि जो हाल कनाडा में है, उसको लेकर चिंता बढ़ी है। कई अभिभावकों ने इस चिंता को उनके समक्ष जाहिर किया है। कई अभिभावकों ने बच्चों को सलाह दी है कि डिप्रेशन में जाने के स्थान पर वह वापसी का रुख करें तो बेहतर होगा। इसी वजह से इस साल कनाडा में जाने वालों की संख्या 50 फीसदी कम हो गई है।

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