पंजाब में लोहे के दाम में दो दिन में पांच रुपये किलो की बढ़ोतरी से हाहाकार मच गया है। दिक्कत यह है कि निर्यातकों ने पुराने दाम पर विदेशों से आर्डर बुक कर रखे हैं और कच्चे माल की कीमत की बढ़ोतरी से उनकी जेब से पैसा खर्च होने जा रहा है। उद्यमी इस बात से चिंतित हैं कि कोरोना काल से इंडस्ट्री पहले ही संकट में है और अभी तक कारोबार पटरी पर नहीं आया है। ऊपर से कच्चे माल की कीमत पांच रुपये प्रति बढ़ गई है। लोहे के दाम बढ़ने का का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर, ऑटो स्पेयर पार्ट्स, भवन निर्माण सामग्री और इंडस्ट्री के प्रोडक्शन पर पड़ रहा है।
स्टील कंपनियों की मनमानी से संकट : सग्गू
जालंधर फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू का कहना है कि केंद्र सरकार ने विदेशों में निर्यात होने वाले लोहे से एंटी डंपिंग ड्यूटी कम कर दी है, जिसका प्रभाव घरेलू उद्योग पर हो रहा है। बड़ी बड़ी स्टील कंपनियों ने निर्यात को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है, जिस कारण घरेलू सप्लाई कम हो गई है और मार्केट के दाम में उछाल आ गया है। स्माल व मीडियम स्केल इंडस्ट्री तो बंद हो जाएगी। इस पर जल्द अंकुश लगना चाहिए।
आगे ही सकंट है, हाल बेहाल है...बिंटा सेठ
आटो पार्ट्स बनाने वाले उद्यमी बिंटा सेठ का कहना है कि कोरोना के बाद से लोहे के दाम बढ़ने से स्माल स्केल इंडस्ट्री पर काफी बुरा प्रभाव पड़ने जा रहा है। तमाम तरह के ऑटो पार्ट्स, गाड़ियों के कलपुर्जे, स्कूटर, थ्री व्हीलर, फोर व्हीलर में स्टील का प्रयोग होता है। उनकी मोटर पार्ट्स इंडस्ट्री पर काफी बुरा असर हुआ है। लोहे का दाम 42 रुपये प्रति किलो था लेकिन अब 47 रुपये पार कर गया है। यह तो आज का दाम है, कल क्या होगा कुछ भी पता नहीं है। पंजाब की इंडस्ट्री आगे ही संकट से निकल रही है।
सरकार चाहे तो कम हो सकते हैं दाम : चावला
स्टील कारोबारी अमरजीत सिंह चावला का कहना है कि दो दिन में लोहे के दाम में उछाल आने से ट्रैक्टर पार्ट्स, हथोड़ा, हल, थ्रेशर, कील, छलनी समेत बहुत सारे पार्ट्स के रेट बढ़ गए हैं। सरकार चाहे तो लोहे के दाम कम हो सकते हैं। सरकार ने लोहे पर एंटी डंपिंग ड्यूटी इसलिए लगाई थी कि घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिल सके। यहां से कच्चा माल निर्यात होने के स्थान पर तैयार होकर प्रोडक्ट विदेशों में जाकर बिके लेकिन सरकार ने घरेलू उद्योग को संकट में डाल दिया है।
निर्यातक क्या करेगा ? सरकार को सोचना चाहिए.. गुरशरण सिंह
लोहे के रेट बढ़ने से सबसे अधिक प्रभाव हैंड टूल व आटो इंडस्ट्री और पाइप फिटिंग इंडस्ट्री के अलावा साइकिल उद्योग पर पड़ा है। बढ़े हुए रेट पर विदेशों से ऑर्डर पर भी असर पड़ने जा रहा है। हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि कैसे संभव होगा जब हमने आर्डर ही 42 रुपये किलो के हिसाब से बुक किया है और सोमवार का दाम 47 रुपये से अधिक है, जब तक माल तैयार होगा लोहे के दाम कहां होंगे कुछ पता नहीं है। कैसे हम निर्यातक अपने आर्डर को भुगता पाएंगे।