आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी और निहत्थी सिख संगत पर गोलियां चलाने की दर्दनाक घटनाएं फिर से चुनावी मुद्दा बनेगीं। 2015 में घटी इन दर्दनाक घटनाओं में सात साल बाद भी संगत इंसाफ के लिए तरस रही है। इन सात सालों में आयोग से लेकर सीबीआई और एसआईटी के बार बार गठन के बावजूद इंसाफ नहीं मिला।
12 अक्तूबर 2015 को गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने का मामला सामने आया था। इस घटना से सिख संगत में व्यापक स्तर पर रोष फैल गया था। इसके खिलाफ प्रदेश भर में जगह जगह रोष प्रदर्शन हुए और राज्य की सभी मुख्य सड़कों पर चक्का जाम कर दिया गया। लोगों में इस बात को लेकर रोष था कि बेअदबी की घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों ने घटना से करीब साढ़े तीन माह पहले एक जून 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी किया और इसके बाद 24-25 सितंबर 2015 की रात को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में ही गुरुद्वारा साहिब के बाहर अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर लगाकर पुलिस प्रशासन व सिख संगत को चुनौती दी थी। पुलिस पावन ग्रंथ की चोरी व पोस्टर लगाने के मामलों का कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई और पोस्टर लगाने की घटना के 18 दिन बाद ही बरगाड़ी में पावन ग्रंथ की बेअदबी कर दी गई। इस मामले में उस समय और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब 14 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी से ही सटे गांव बहिबल कलां में बेअदबी मामले को लेकर सिख संगत के शांतिपूर्ण धरने को जबरन उठाने के लिए पुलिस ने सीधी फायरिंग कर दी जिसमें दो सिख नौजवानों गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह और गांव सरावां के गुरजीत सिंह की मौत हो गई।
बरगाड़ी बेअदबी की घटना सामने आते ही हजारों की तादाद में सिख संगत बरगाड़ी पहुंच गई और पावन ग्रंथ के खंडित पन्नों को साथ लेकर उसी दिन कोटकपूरा के मुख्य चौक में बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया था। 14 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने लाठी व गोली का प्रयोग करते हुए इस धरने को जबरन उठवाया जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। कोटकपूरा में धरना उठवाने के बाद बरगाड़ी से सटे गांव बहिबल कलां में रोष धरने पर बैठी सिख संगत पर भी पुलिस द्वारा फायरिंग की गई जिसमें गांव सरावां के गुरजीत सिंह व गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह की मौत हो गई थी। शहीद दोनों सिख नौजवानों के परिवारों समेत घायल अभी इंसाफ की राह ताक रहे है। हालांकि बहिबल गोलीकांड मामले में तो 21 अक्टूबर 2015 को थाना बाजाखाना में अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया था लेकिन कार्रवाई कोई नहीं की गई थी।
जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंजाब सरकार ने 12 अगस्त 2018 को बहिबल गोलीकांड वाले केस में तत्कालीन एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह, एसएसपी मोगा के रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह व तत्कालीन थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया। इसके अलावा कोटकपूरा के मुख्य चौक में जत्थेबंदियों के धरने पर फायरिंग मामले में भी आयोग की सिफारिश पर 7 अगस्त 2018 को अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा ए कत्ल की एफआईआर दर्ज की गई है। आयोग की ही हिदायत पर पंजाब सरकार ने कोटकपूरा व बहिबलकलां गोलीकांड मामलों की जांच के लिए एडीजीपी प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया, जिसमें आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह भी शामिल थे।
केस में पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा और कोटकपूरा गोलीकांड में पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा के अलावा शिअद के पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसपी बलजीत सिंह, एसपी परमजीत सिंह पन्नू, एसआई गुरदीप सिंह पंधेर को नामजद किया गया लेकिन हाईकोर्ट ने झटका देकर कोटकपूरा केस ही खारिज कर दिया। अब हाईकोर्ट के आदेशों पर दोबारा एसआईटी का गठन किया जा चुका है जो केसों की बारीकी से जांच कर रही हैं। देश विदेशों में बसी सिख संगत बेअदबी व गोलीकांड में इंसाफ की उम्मीद है।
आप के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह का कहना है कि 2017 में श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी बड़ा मुद्दा था और इस बार भी रहेगा। पहले अकाली भाजपा दोषी थी अब कांग्रेस दोषी है। अगर इंसाफ नहीं मिला तो जनता व आम आदमी पार्टी चुनावों में इस मुद्दे पर जवाब मांगेगी क्योंकि पहले अकाली दल भाजपा ने अब कांग्रेस ने पांच साल गुमराह किया है।
चुनाव में तीन माह के करीब का समय बचा है लेकिन पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू बेअदबी व गोलीकांड में अपनी सरकार को ही घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लगातार ट्वीट कर इस मुद्दे को उठाकर चल रहे हैं।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि कांग्रेस ने पिछले चुनावों में लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया था। पांच साल किया कुछ नहीं है सिर्फ लोगों के साथ झूठ बोला गया। चुनावों में अकाली दल मांग करेगा क्योंकि अकाली दल की सरकार के समय जो आयोग व एसआईटी बनी थी, उसको उलटा कांग्रेस ने खत्म कर रिपोर्ट को दरकिनार किया है। बेअदबी के केसों में इंसाफ तो मिलना ही चाहिए।