पंजाब का इतिहास इस बात का साक्षी है कि सूबे की सियासत हमेशा से जाट सिखों के इर्द गिर्द रहती है। ज्यादातर जाट चेहरे ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रहे हैं। भाजपा ने जाट महासभा के प्रधान रह चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ गठबंधन कर पंजाब में सियासी समीकरण पैदा करने शुरू कर दिए हैं। जहां भाजपा का शहरों में जनाधार है वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह व ढींढसा का गांवों में।
प्रदेश में करीब 20 फीसदी जाट सिख वोटर हैं। 32 फीसदी एससी वोटर और करीब 38 फीसदी हिंदू मतदाता हैं। दोआबा में जीत का आधार दलित और हिंदू वोटरों को माना जाता रहा है। भाजपा राष्ट्रवाद व हिंदू वोट को लेकर अपना ध्रुवीकरण कर रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर भी भाजपा का साफ तर्क है कि वे राष्ट्रवादी नेता हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह मालवा व माझा में जाट वोटरों को अपनी तरफ लाने की पूरी कोशिश करेंगे। वह लगातार जाट महासभा के प्रधान रहे हैं, उनका जाटों में खासा जनाधार है।
इसके अलावा कांग्रेस में टिकट आवंटन व आचार संहिता लागू होने के बाद पैदा होने वाली स्थिति पर भी कैप्टन की नजर रहेगी क्योंकि पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू कह चुके हैं कि कई कांग्रेसी विधायकों की टिकट कट सकती है। ऐसे में जिन विधायकों की टिकट कटेगी कैप्टन अमरिंदर सिंह उनको अपनी पार्टी में लाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस की कलह का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं। कांग्रेस में इस समय सबकुछ ठीकठाक नहीं है। पीपीसीसी के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ से लेकर सांसद मनीष तिवारी मुखर हैं और लगातार कांग्रेस को घेर रहे हैं। पीपीसीसी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू खुद सीएम चन्नी को हर कदम पर घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लिहाजा कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेसी कलह का पूरा फायदा लेकर अपनी पार्टी को मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा मालवा में काफी कमजोर है हालांकि माझा में पठानकोट व गुरदासपुर और अमृतसर सिटी एरिया में भाजपा की हालत ठीक है। दोआबा में भाजपा का वोट बैंक है और जालंधर सिटी, होशियारपुर, फगवाड़ा में भाजपा मजबूत स्थिति में है। होशियारपुर के कंडी क्षेत्र में भाजपा का काफी जनाधार है। जहां से सोमप्रकाश सांसद निर्वाचित हुए और केंद्र में राज्यमंत्री बने। मालवा में अबोहर में ही भाजपा का विधायक अरुण नारंग हैं। बाकी क्षेत्रों से भाजपा को कैप्टन अमरिंदर सिंह व ढींढसा से उम्मीद रहेगी।
भाजपा के दिग्गज नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे सीएम का चेहरा नहीं होंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह व भाजपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इसमें सुखदेव सिंह ढींढसा का भी रोल होगा लेकिन उनका हिस्सा काफी कम होगा। यह भी बात साफ है कि यह गठबंधन पंजाब में इतिहास रचेगा।