जालंधर। जिले में कोरोना का प्रकोप दोबारा बढ़ने के बाद कोविड वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या ज्यादा होने से कई लोगों को बैंरग वापस लौटना पड़ रहा है। ओमिक्रॉन की दस्तक का खौफ इतना है कि एक सप्ताह में कोरोना वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या में अढ़ाई गुणा के करीब बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैक्सीन लगवाने के लिए लोग सिविल अस्पताल और सरकारी डिस्पेंसरी में जा रहे हैं पर वैक्सीन लगवाने वालों की ज्यादा भीड़ के कारण लोग परेशान हैं। इससे सबसे ज्यादा महिलाओं व बुजुर्गों को जूझना पड़ रहा है।
जालंधर के सिविल अस्पताल व सरकारी वैक्सीन सेंटरों में शुक्रवार को 117 सेंटरों में 13139 और शनिवार को 12 से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई गई। वहीं जानकार बताते हैं कि वैक्सीन लगवाने वालों का आंकड़ा 20 हजार से पार हो चुका है। करीब 7 से 8 हजार लोगों को बिना वैक्सीन लगवाए वापस लौटना पड़ा है। सिविल अस्पताल में रोेजाना एक हजार के करीब लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। अस्पताल में वैक्सीन लगवाने के लिए करीब 1700 से 1800 लोग पहुंच रहे हैं।
प्राइवेट सेंटरों पर वैक्सीन न लगने से बढ रही है सिविल में भीड़
सरकार व जिला प्रशासन ने कुछ माह पहले प्राईवेट अस्पतालों को कुछ रुपये लेकर कोरोना वैक्सीन लगाने की इजाजत दी थी। इन प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है, जिसके कारण हर एक व्यक्ति को वैक्सीन के लिए सिविल अस्पताल या फिर सरकारी वैक्सीन सेंटर पर जाना पड़ रहा है। कोरोना वैक्सीन मात्र सरकारी अस्पतालों व सरकारी सेंटरों में ही लगने के कारण यहां लोगों की भीड़ उमड़ रही है, जिसके चलते सरकारी डॉक्टरों व नर्सों को भी खासी दिक्कत हो रही है।
वैक्सीन की उपलब्धता व समय सीमा तक लगाई जाती है वैक्सीन
सिविल अस्पताल के डॉक्टर राकेश चोपड़ा का कहना है कि वैक्सीन की उपलब्धता व समय सीमा के हिसाब से सिविल में लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। दोपहर 2 बजे और वैक्सीन की उपलब्धता तक जितने भी लोगों को वैक्सीन लग सके, लगाई जाती है। कुछ लोगों को वापस जाना पड़ता है। हम बाकी लोगों को अगले दिन आकर वैक्सीन लगवाने को कह देते हैं। लोग ज्यादा होने के कारण थोड़ी परेशानी तो आ रही है पर जल्द इसका हल हो जाएगा।