दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख महाराज आशुतोष अब भी गहन समाधि में हैं। उनके अनुयायिओं व सेवादारों को अब भी विश्वास है कि वे समाधि से जरूर वापस लौटेंगे।
सेवादारों का कहना है कि महाराज आशुतोष की समाधि विज्ञान से ऊपर की बातें हैं। महाराज आशुतोष के लिए अब भी जेड सिक्योरिटी लगाई गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में यह लिखित तौर पर कहा जा चुका है कि महाराज आशुतोष क्लीनिकल डेड हैं।
बुधवार को नूरमहल में डेरा दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में माहौल आम दिनों जैसा रहा। संगत रोजाना की तरह पहुंची। लोगों ने सतसंग हाल में ध्यान कर लंगर ग्रहण किया और लौट गए।
दिन में तीन बजे के करीब संस्थान के प्रवक्ता स्वामी विशालनंद की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित थी, लेकिन ऐन वक्त पर इसे स्थगित कर दिया गया। बताया गया कि दिल्ली से आने वाले किसी विशेष आगंतुक की मेजबानी के लिए स्वामी विशालानंद खुद जालंधर गए हुए हैं। हालांकि वह आगंतुक कौन है इसका खुलासा नहीं किया गया।
शरीर अब भी फ्रीजर में :
डेरे से मिली जानकारी के मुताबिक महाराज आशुतोष का शरीर अभी भी फ्रीजर मेें रखा हुआ है। जस रूम में शरीर है, वहां पर उनके कुछ सेवादार हर वक्त ध्यान में बैठे रहते हैं। बताया जाता है कि प्रत्येक आधे घंटे बाद महाराज आशुतोष के शरीर को चेक किया जाता है। महाराज आशुतोष के डेरे के एक प्रमुख सेवादार ने बताया कि यह समाधि विज्ञान को खुली चुनौती है। उनकी समाधि साइंस से ऊपर की बात है।
एसएसपी ने उठाए सवाल :
एसएसपी जालंधर जसप्रीत सिंह सिद्धू का कहना है कि आठ दिन पहले ही महाराज आशुतोष की डेथ हो चुकी है। फिर उन्हें अवैध रूप से भला कैसे बंधक बनाया जा सकता? ऐसे में वह जेड सुरक्षा क्लीनिकल डेथ संत को कैसे मुहैया करवा सकते हैं? उन्होंने कहा कि जल्द ही यह सिक्योरिटी हटवा ली जाएगी। दूसरी ओर सवाल अभी भी जारी है कि आखिरकार आठ दिनों तक सरकार ने कैसे आंखे मूंदे रखी?