पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सूबे के जिला प्रमुख की कमान आईपीएस अधिकारियों के हवाले कर अपने तेवरों से अवगत करवा दिया है। मान के पास पंजाब का गृह विभाग भी है। उन्होंने एक भी पीपीएस अधिकारी को किसी जिला पुलिस का प्रमुख नहीं लगाया, हालांकि कैप्टन, बादल व चन्नी की सरकार में पीपीएस अधिकारियों को तरजीह दी जाती रही है। लिहाजा, पीपीएस अधिकारी तमाम आईपीएस अधिकारियों के मातहत ही लगाए गए हैं।
पंजाब में तीन जिलों जालंधर, लुधियाना व अमृतसर में पुलिस कमिश्नर तैनात हैं, जिनकी तैनाती डीआईजी व आईजी स्तर के अधिकारियों की है। जबकि आठ पुलिस जोन हैं, जिनमें बार्डर रेंज में 5 जिले, पटियाला में तीन, रूपनगर में तीन, जालंधर में तीन, लुधियाना में पांच, बठिंडा में 2, फिरोजपुर व फरीदकोट में 3-3 जिले हैं। पंजाब में इन तमाम जिलों में मान सरकार में आईपीएस अधिकारी जिला पुलिस प्रमुख लगाए गए हैं।
हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल और चन्नी की सरकार में पीपीएस अधिकारियों को भी जिला पुलिस प्रमुख लगाया जाता रहा है। चुनावों से पहले मोहाली में एसएसपी नवजोत सिंह माहल तैनात थे, जो पीपीएस अधिकारी थे। होशियारपुर के एसएसपी कुलवंत सिंह भी पीपीएस हैं। इसके अलावा हरकंलवप्रीत सिंह खख पीपीएस भी कपूरथला के एसएसपी थे। मोगा की कमांड पीपीएस अधिकारी सुरिंदरजीत सिंह मंड और बटाला की पीपीएस अधिकारी मुखविंदर सिंह के पास थी। खन्ना के एसएसपी बलविंदर सिंह भी पीपीएस अधिकारी ही थे, जिनके स्थान पर अब तमाम आईपीएस अधिकारी वर्क करेंगे।
फील्ड में चार महिला आईपीएस भी मैदान में हैं, जिनमें अमनीत कौंडल, कंवरदीप कौर, अलका मीणा, रवजोत कौर ग्रेवाल शामिल हैं। पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पंजाब में पीपीएस अधिकारियों को इसलिए किनारे किया गया है क्योंकि मान सरकार आईपीएस पर अधिक भरोसा लेकर चल रही है। उनको उम्मीद है कि आईपीएस अधिकारी निष्पक्षता से काम करेंगे और कानून व्यवस्था व नशा खत्म करने में राजनीतिक दवाब से दूर रहेंगे। हालांकि सरकार के इस कदम से अंदरखाते पीपीएस लॉबी में जबरदस्त चर्चा चल रही है कि आईपीएस अधिकारियों ने काम तो पीपीएस अधिकारियों से ही लेना है। पीपीएस अधिकारी तो पंजाब से ही प्रमोट होकर एसपी व एसएसपी बनते हैं, जिनका नेटवर्क आईपीएस अधिकारियों से अधिक मजबूत होता है। लिहाजा, पंजाब पुलिस में इस समय आईपीएस लॉबी अधिक पॉवरफुल हो गई है।