पंजाब में 117 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न हो गया है और तमाम उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है। पंजाब के दोआबा व माझा में औसतन 67 फीसदी वोट पड़ा है जबकि मालवा में 70 फीसदी। मालवा के मुक्तसर में 78 फीसदी मतदान हुआ है। लिहाजा पार्टियों के तमाम दिग्गज माझा, मालवा व दोआबा को लेकर अपना सियासी गणित तैयार करने में लगे हुए हैं।
आम आदमी पार्टी की महिला विंग की प्रधान राजविंदर कौर थियाड़ा का कहना है कि कम मतदान की वजह से कोई नुकसान नहीं हो सकता। यह भी हमें समझना होगा कि कोरोना की तीसरी लहर चल रही थी। बुजुर्ग लोग मतदान में इस कारण नहीं निकल पाए। कई बीमार थे, वह भी मतदान में कोरोना के कारण हिस्सा नहीं ले पाए। रविवार को चुनाव भी मुख्य कारण था, जिस कारण मतदान कम हुआ लेकिन इतना तय है कि आप की आंधी पंजाब में चली है।
सुखबीर बादल के सलाहकार जंगवीर का कहना है कि शिअद-बसपा गठजोड़ शिरोमणि अकाली दल का अपना 30 फीसद के करीब पक्का वोट बैंक है। 2017 में सत्ता विरोधी लहर थी लेकिन अकाली दल का मत प्रतिशत कांग्रेस के बाद दूसरे नंबर पर था। बसपा के साथ आने से अकाली दल मजबूत हुआ है। माझा में 67 फीसदी मतदान हुआ है तो किसी भी सीट पर अकाली दल को कम नहीं आंका जा सकता है, वहां पर अकाली दल भी हर सीट पर टक्कर में रहा है।
किसको सीट मिलेगी, किसको नहीं यह कहना ठीक नहीं होगा लेकिन वोट प्रतिशत का कम होने का कारण वहां पर वोटरों का हाताश होना भी हो सकता है, अगर किसी एक पार्टी के प्रति वोटर मतदान करता तो निश्चित तौर पर मत प्रतिशत भी बढ़ता और एक अलग तरह का उत्साह भी देखने को मिलता। दोआबा में भी बसपा के साथ गठबंधन से पार्टी को मजबूती मिली है, बेशक मतदान 67 फीसदी है लेकिन आरक्षित सीटों पर अकाली दल ने पूरी ताकत दिखाई है। मालवा में भी अकाली दल आगे से मजबूत हुआ है। मतदान प्रतिशत गिरने का कोई नुकसान अकाली दल बसपा गठबंधन को इसलिए नहीं होगा क्योंकि हमारा कैडर व वर्कर मजबूत था।
कांग्रेस के उपाध्यक्ष हिमांशु पाठक का कहना है कि सत्ता विरोधी लहर का सामना हर उस पार्टी को करना पड़ता है, जो सत्ता में होती है। कांग्रेस सत्ता में थी, इसलिए सभी पार्टियों के निशाने पर थी। आप से लेकर अकाली दल, बसपा, भाजपा सबने चन्नी सरकार को टारगेट किया तो सत्ता विरोधी लहर तीखी हुई लेकिन इसको लपकने के लिए आप फेल हो गई, क्योंकि आखिरी तीन दिन में आप का ग्राफ भी गिरा। माझा में 2017 में कांग्रेस ने माझा में जबरदस्त आंधी खड़ी की थी।
भाजपा अलग तरह से आंकलन कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश शर्मा का कहना है कि हर साल 1.5 लाख बच्चे विदेश जाते हैं, दो साल में तीन लाख बच्चे विदेशों में हैं लेकिन उनका वोट यहां बना हुआ है। उनका कहना है कि यह आम बात कही जाती है कि मत प्रतिशत गिरने का फायदा सत्ताधारी पार्टी को होता है लेकिन इस बार चुनाव में कई खामियां रहीं। विदेशों में गए बच्चे वोट डालने नहीं आ सके। दूसरा, बीएलओ ने जमीनी स्तर पर लोगों को वोट के लिए जागरूक नहीं किया, उन तक एप्रोच नहीं हुई।
प्रशासन व चुनाव आयोग की तरफ से वोटरों को जागरूक करने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं किए गए, रैलियों पर काफी समय तक प्रतिबंध रहा। उनका कहना है कि पार्टी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा, माझा व दोआबा में पार्टी की स्थिति दमदार हुई है। बेशक 67 फीसदी मतदान हुआ है लेकिन भाजपा ने दोआबा व माझा की काफी सीटों पर सीधी टक्कर विरोधियों को दी है।