कपूरथला। चिलचिलाती गर्मी में नींबू का ‘स्वाद’ चखना कपूरथला माडर्न जेल के सुपरिंटेंडेंट गुरनाम लाल को महंगा पड़ गया और उन्हें पद से निलंबित होना पड़ा। सुनने में अटपटा जरूर लगे, लेकिन हकीकत यही है कि जेल में नींबू घोटाले के चलते जेल मंत्री हरजोत बैंस के आदेश पर एडीजीपी-जेल वरिंदर कुमार ने गुरनाम लाल को तुरंत सस्पेंड कर दिया है।
आसमान छूते नींबू के भाव के कारण जहां आम आदमी ने नींबू से दूरी बना ली, वहीं जेल सुपरिंटेंडेंट ने 50 किलो नींबू जेल में मंगवाए, लेकिन एक भी नींबू जेल के कैदियों को नसीब नहीं हुआ और इसकी शिकायत कैदियों ने उच्च अधिकारियों से कर दी। यहीं नहीं, एडीजीपी के आदेश पर डीआईजी जेल ने एक मई को औचक निरीक्षण किया, जिसमें जेल में राशन के अलावा अन्य कई अनियमितताएं पाई गईं। जिसके चलते जेल सुपरिंटेंडेंट को सस्पेंड किया गया है।
इस पूरे गबन का खुलासा उस समय हुआ, जबकि कैदियों की ओर से मिल रही शिकायत के चलते एक मई को डीआईजी जेल कपूरथला से आठ किलोमीटर दूर स्थित थेह काजला में जालंधर-कपूरथला जिलों के लिए बनी माडर्न जेल में जांच करने पहुंचे। डीआईजी के साथ लेखा अधिकारी ने जांच में पाया कि सुपरिंटेंडेंट गुरनाम लाल ने 15 से 30 अप्रैल के बीच 50 किलो नींबू खरीदे थे, उस समय नींबू की कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक थी।
दूसरी ओर से कैदियों ने दावा किया है कि रसोई में नींबू का कभी इस्तेमाल किया ही नहीं गया। जेल मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कपूरथला जेल अधीक्षक गुरनाम लाल को कुप्रबंधन और कैदियों के राशन में कथित हेराफेरी के लिए निलंबित करने का आदेश दिया है। जेल अधिकारी ने अन्य अनियमितताओं के बीच 50 किलो नींबू की खरीद दिखाई थी। कैदियों की कई शिकायतों के बाद जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि कैदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता खराब थी और जेल नियमावली में तय मात्रा पर्याप्त नहीं थी। जेल में बन रही हर चपाती का वजन 50 ग्राम से कम था, जिससे संकेत मिलता था कि कई क्विंटल आटे का भी गबन हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल अधिकारी की तरफ से सब्जियों की खरीद में भी गड़बड़ी की गई है।
जेल अधीक्षक ने पांच दिन सब्जियाें की खरीद दिखाई, लेकिन कैदी इससे कम दिनों के लिए सब्जियां खरीदने का दावा कर रहे हैं। जांच पैनल की ओर से जेल मंत्री को सौंपी रिपोर्ट में दवा की अनुपलब्धता, परिसर के खराब रखरखाव और मातहत अधिकारियों पर नियंत्रण की कमी का भी उल्लेख किया गया है। इस औचक जांच में पता चला कि जेल सुपरिंटेंडेंट का जेल प्रशासन पर नियमावली के अनुसार पूर्ण कंट्रोल नहीं था। अधिकारी को जेल में कुप्रबंधन और धन के उपयोग में गबन की इन रिपोर्टों के अलावा अपने कर्तव्यों और जेल प्रशासन के प्रति भी लापरवाह पाया गया है। सूत्रों के अनुसार गुरनाम लाल पर आरोप पत्र दायर किया जाएगा।
उधर, जेल मंत्री हरजोत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कॉल उनके किसी सहायक ने उठाई और कहा कि मंत्री व्यस्त हैं, बात नहीं हो सकती है। कपूरथला जेल सुपरिंटेंडेंट के निलंबन की पुष्टि करते हुए एडीजीपी-जेल वरिंदर कुमार ने बताया कि कपूरथला जेल के सुपरिंटेंडेंट के तौर पर शिवराज सिंह को चार्ज दिया गया हैं। जल्द ही नए सुपरिंटेंडेंट की तैनाती कर दी जाएगी।