हमारे देश में दिवाली को रोशनी का त्योहार कहा जाता है व इस दिन हर कोई अपने घर को लाइट्स लगाकर रोशन करता है। ज्यादातर लोग अब अपने घरों को रोशन करने के लिए इलेक्ट्रिक लड़ी व इलेक्ट्रिक दीपक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि यह इलेक्ट्रिक लड़ी व दीपक सभी 99 प्रतिशत चीन के इस्तेमाल हो रहे हैं।
महानगर जालंधर की बात करें तो आज भी इस शहर के काफी हद तक घर इस चाईनीज लड़ियों व दीपक से ही रौशन हो रहे हैं। हालांकि देश में चीन के माल के बॉयकाट की लहर चल रही है, लेकिन इसके बाद भी जालंधर की इलेक्ट्रिक मार्केट पर चीन के माल का ही कब्जा है। जालंधर की फगवाड़ा गेट इलेक्ट्रिक मार्केट में आज भी 99 प्रतिशत से ज्यादा चीन का ही माल बिक रहा है।
मार्केट के प्रधान जॉय मलिक से बात की तो उन्होंने कहा कि आज भी 99 प्रतिशत लोग चीन की लड़ी, दीपक व अन्य सजावट का समान खरीद रहे हैं। उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि चीन की लड़ी 40 से 50 रुपये में मिल जाती है, वहीं इंडियन लड़ी का मूल्य 150 से 170 रुपये है।
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इसके अलावा बाजार में चीन के दीपक ऐसे मिल रहे हैं, जो कि पानी से चलते हैं। चीन के इस दीपक में पानी डालो तो यह अपने आप जल उठते हैं। बड़ी बात यह है कि इस दीपक की कीमत भी मात्र 30 से 40 रुपये के करीब ही है। सस्ता होने के कारण चीन की लड़ी व दीपक की मांग भी बहुत है।
फगवाड़ गेट मार्केट के ही पूर्व प्रधान अमित सहगल का कहना है कि बाजार में चाईना के प्रोडक्ट का कब्जा होने का मुख्य कारण चाईनीज सामान का सस्ता होना है। लोग चाईनीज लड़ी व अन्य सामान को इस लिए भी ज्यादा पंसद करते हैं, क्योंकि चीन की लड़ियां, दीपक, बल्ब आदि सस्ता होने के साथ एक साल भी चल गया तो लोग अगले साल नईं लड़ीयां व दीपक आदि ले लेते हैं।
चाईनीज लड़ी 40 रूपए व इंडियन लड़ी 170 रुपये की मिलती है। लोग चार साल भी नईं चाईना की लड़ी खरीदें तो भी उनके 4 साल में 160 रुपये ही लगते हैं, जबकि इंडियन लड़ी एक बार खरीदने में ही 160 से 170 रूपए लग जाते हैं। इसलिए आज भी जालंधर की फगवाड़ा गेट मार्के में चीन के सामान का ही कब्जा है।
फगवाड़ा गेट इलेक्ट्रिक मार्केट के जरनल सचिव राकेश कपूर का कहना है कि चीन का सामान का मुकाबला हो सकता है, लेकिन सरकार के पास इसको लेकर कोई बढ़िया पॉलिसी ही नहीं है। चीन की सरकार व्यापारियों व उद्योगपतियों को सहूलियतें देती हैं जो भारत में नहीं मिल पा रही हैं।