पंजाब में रातोंरात सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को नया डीजीपी लगाए जाने के फैसले से सियासत गरमा गई है। सूत्रों के अनुसार, डीजीपी बदलने का निर्णय पंजाब सरकार ने ऐसे ही नहीं लिया। डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा डीजीपी इकबालप्रीत सिंह सहोता को लिखी चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद से सीएम चरणजीत चन्नी सहोता से खासे नाराज चल रहे थे। सरकार का एक्शन प्लान सार्वजनिक कैसे हो गया, इस बात से चन्नी काफी नाखुश थे। इससे चन्नी सरकार की खासी फजीहत भी हुई थी। पंजाब पुलिस के इनवेस्टिगेशन ब्यूरो के निदेशक एडीजीपी सतीश कुमार अस्थाना ने सहोता को पत्र लिखा था कि अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर जिन ड्रग्स मामलों में कार्रवाई करने का दबाव चन्नी सरकार द्वारा बनाया जा रहा है, वह कार्रवाई कानूनी तौर पर ठीक नहीं है।
एसके अस्थाना 11 दिसंबर को तब छुट्टी पर चले गए जब उनकी मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मीटिंग पहले से तय थी। इस मीटिंग में ही चन्नी को ड्रग रैकेट पर जांच और तथ्यों पर जानकारी लेनी थी लेकिन अस्थाना छुट्टी पर चले गए। छुट्टी को लेकर भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा गया कि दिल की समस्या के कारण डॉक्टर ने उन्हें 48 घंटे पूरी तरह आराम करने के लिए कहा है। इसलिए वह मेडिकल लीव पर जा रहे हैं। उनके कार्यालय की तरफ से डायरेक्टर जरनल ऑफ पुलिस से निवेदन किया गया था कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित कर दें कि वह मीटिंग में नहीं आ सकेंगे। इसके साथ ही अस्थाना का पत्र भी सार्वजनिक हो गया, जिसमें उन्होंने कार्रवाई से आनाकानी की थी।
वहीं इसके बाद शिरोमणि अकाली दल को भी मौका मिल गया और पहले से इंतजार कर रहे सुखबीर बादल ने आरोप लगाया कि चन्नी सरकार के कुछ मंत्री, डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा और पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में हुई बेअदबी की घटनाओं को लेकर उन्हें और बिक्रम मजीठिया को झूठे केसों में फंसाना चाहते हैं। इसके लिए सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग की जा रही हैं। संगरूर की कांग्रेसी महिला के बयान दर्ज कर सुखबीर समेत दूसरे नेताओं को नामजद करने के प्रयास हो रहे हैं। इससे चन्नी सरकार की खासी फजीहत हुई और चन्नी ने डीजीपी सहोता को सरकारी पत्र लीक करने के मामले में केस दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन डीजीपी सहोता ने 72 घंटे में मामला ही दर्ज नहीं किया।