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भारतीय सेना ने कैप्टन अरुण जसरोटिया की शहादत को किया नमन

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पठानकोट। सेना द्वारा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर की लोलाब घाटी पर पाक प्रशिक्षित आतंकियों से लड़ते हुए शहादत पाने वाले स्पेशल फोर्स के कैप्टन अरुण जसरोटिया अशोक चक्र, सेना मेडल व निशान-ए-खालसा का बलिदान दिवस मनाया गया।
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सेना के सब एरिया द्वारा टैंक चौक के नजदीक बने शहीदी स्मारक जहां शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया की प्रतिमा लगी है, पर एक प्रभावशाली श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इसमें शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया के पिता रिटायर्ड कर्नल प्रभात जसरोटिया, भाई राकेश जसरोटिया व शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की व सैन्याधिकारियों ने शहीद कैप्टन जसरोटिया की प्रतिमा के समक्ष रीथ चढ़ाकर शहादत को नमन किया। सेना के जवानों ने शहीद को सलामी दी। सब एरिया द्वारा आयोजित गौरवशाली कार्यक्रम में सेना द्वारा 1971 भारत-पाक युद्घ की जीत को समर्पित भारत की चारों दिशाओं में निकाली जा रही स्वर्णिम विजय मशाल यात्रा भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनी।
स्वर्णिम विजय मशाल का स्वागत शहीद के पिता कर्नल प्रभात जसरोटिया ने किया। बता दें, वह खुद भी भारत-पाक युद्घ में हिस्सा लेकर अपनी वीरता का जौहर दिखा चुके हैं। शहीद कैप्टन अरुण जसरोटिया के भाई राकेश जसरोटिया ने कहा कि शहीदों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होकर शहीद परिवारों का मनोबल बढ़ता है और वह यह महसूस करते हैं कि बेशक उन्होंने अपने घरों के चिराग राष्ट्र की बलिवेदी पर कुर्बान कर दिए, मगर कोई तो है जो उनके लाडलों की शहादत की गरिमा को बहाल रखे हुए हैं। परिषद महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की ने भव्य कार्यक्रम के लिए सब एरिया कमांडर व उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना ही सही मायनों में शहीदों व उनके परिजनों का दिल से सम्मान करती है। कैप्टन अरुण जसरोटिया अशोक चक्र की शहादत के 26 वर्षों बाद भी सेना द्वारा उनके परिजनों को इस कार्यक्रम में निमंत्रित कर जो मान सम्मान दिया, उससे उनका मनोबल ऊंचा हुआ है।
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