पंजाब भाजपा के नवनियुक्त प्रवक्ता हरिंदर सिंह काहलों के एक बयान से किसानों का पारा चढ़ गया है। मंगलवार को भाजपा की तरफ से जालंधर में आयोजित स्वागत समारोह में काहलों ने कहा था कि ‘यह तो मोदी साहब बैठे हैं, जो आपके साथ प्यार कर रहे हैं। अगर बदकिस्मती से मेरे जैसे दिमाग वाला आदमी बैठा होता तो अब तक डंडे मार-मार कर आपको जेल में बंद कर देता।’ काहलों ने यह भी कहा कि इन लोगों का यही हल है और अब यही करना पड़ेगा। इसको लेकर किसानों में रोष पैदा हो गया है। नाराज किसानों ने बुधवार रात काहलों के घर का घेराव किया और नारेबाजी की।
किसानों ने मांग की है कि हरिंदर काहलों को अपनी गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए। हालात बिगड़ते देख भारी पुलिस बल काहलों की कोठी के आसपास तैनात कर दिया गया था। इस दौरान राजेवाल ग्रुप के किसान भी जालंधर में काहलों की कोठी के बाहर पहुंचे।
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दोआबा किसान यूनियन नेताओं व कार्यकर्ता ने काहलों के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नेताओं का कहना था कि जब तक काहलों के खिलाफ केस दर्ज करके गिरफ्तारी नहीं होती है, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। पुलिस ने किसानों को कार्रवाई का भरोसा देकर मामला शांत करवाया।
वहीं काहलों की इस टिप्पणी से किसानों के साथ-साथ भाजपा के कई नेता भी नाराज हैं। उन्होंने पार्टी के मंच पर इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वहीं भाजपा के कई नेताओं ने प्रधान अश्वनी शर्मा को कहा है कि काहलों को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। पंजाब में भाईचारा भी है जिसको कायम रखना है। भाजपा के नेता खुलकर नहीं बोल रहे हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो कई दिग्गजों ने काहलों की भाषा पर आपत्ति दर्ज करवाई है।
मंगलवार को काहलों ने अपने स्वागती भाषण में यह भी कहा था कि जब उन्होंने भाजपा ज्वाइन की तो उन्हें किसी व्यक्ति का फोन आया कि गोबर की ट्राली भरकर रखी है। जब उनसे पूछा गया कि वे ऐसा क्यों कह रहे हैं। तो जवाब आया कि आपके दरवाजे के आगे ढेर लगाना है। उन्होंने उसे वेलकम कहते हुए कहा कि साथ में चारपाई और सफेद चादर भी ले आना, क्योंकि जिसने गोबर की ट्राली फेंकने आना है, उसे चारपाई पर लेटकर जाना पड़ेगा। न तो तुम स्टील के बने हो और न मैं प्लास्टिक का बना हूं।
काहलों ने कहा कि यह पंजाब की बदकिस्मती है कि देश का मुखी सब कुछ देने को तैयार है और हम कह रहे हैं कि कुछ नहीं लेना। पंजाब उजड़ चुका है। सरकार छोटे किसानों को बचाने की कोशिश कर रही है लेकिन कुछ लोग नहीं मान रहे। तीनों कानून बारीकी से पढ़ लिए हैं और तीनों ही फायदेमंद हैं।