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कृषि कानून: केंद्र की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे किसान, अमृतसर में लोक इंसाफ पार्टी का प्रदर्शन

Mon, 12 Oct 2020 06:39 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
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पंजाब में किसानों का प्रदर्शन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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किसानों की कोर कमेटी ने फैसला किया है कि 14 अक्तूबर को दिल्ली में होने वाली बैठक में किसान हिस्सा नहीं लेंगे। वहीं भाजपा नेताओं द्वारा किसान जत्थेबंदियों को अर्बन नक्सली कहने की किसानों ने निंदा की है। सोमवार को किसानों ने भाजपा नेता तरुण चुग, भाजपा प्रदेश प्रधान अश्वनी कुमार और हरजीत सिंह ग्रेवाल के पुतले फूंक कर रोष प्रदर्शन किया।

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किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू और सरवन सिंह ने कहा कि दिल्ली से बैठक संबंधी जो न्योता आया है, उसमें ये नहीं लिखा कि किसान जत्थेबंदियों के साथ कौन बैठक करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि कानून को 21वीं सदी का सबसे अच्छा कानून बता रहे है तो बैठक में जाने का मतलब ही नहीं है। सरवन सिंह ने कहा कि किसानों की प्रदेश स्तरीय कोर कमेटी ने फैसला लिया है कि दिल्ली में 14 अक्तूबर को होने वाली बैठक में किसान जत्थेबंदियां हिस्सा नहीं लेंगी।

किसान जत्थेबंदियों का कहना है कि मोदी सरकार ने हरियाणा की 17 किसान जत्थेबंदियों को तो बैठक में शामिल होने का न्योता नहीं दिया। इसके अलावा देश भर की किसान जत्थेबंदियों को भी नहीं बुलाया गया है। मोदी सरकार ऐसा कर पंजाब की किसान जत्थेबंदियों को हरियाणा व देश की अन्य किसान जत्थेबंदियों से अलग करने की साजिश रच रही है।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में भाजपा नेता तरुण चुग किसान जत्थेबंदियों को अर्बन नक्सली बता रहे हैं। भाजपा नेता कह रहे हैं कि कृषि कानून रद्द नहीं होगा, ये पत्थर पर लकीर है। ऐसे बयान के बाद दिल्ली में होने वाली बैठक में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं है। किसान अपना आंदोलन लंबे समय तक जारी रखेंगे।
 

मोदी खुद दें न्योता, तब किसान बातचीत को तैयार: पंधेर 

पुतला फूंकते किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि किसान केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, बशर्ते प्रधानमंत्री मोदी उन्हें खुद बातचीत के लिए बुलाएं।

वहीं सोमवार को कमेटी के सदस्यों ने देवीदासपुर रेल ट्रैक पर हाथों में जंजीरें बांधकर कृषि कानूनों का विरोध किया। किसानों ने मोदी सरकार से मांग की है कि वह इस कानून को लागू कर किसानों को जंजीरों से बांधने की साजिश रच रही हैं। 

इस कानून से किसानों की फसल और जमीन बड़े घरानों के कब्जे में चली जाएगी। किसानों के पास जमीन नहीं रहेगी तो किसान जियेगा कैसे।पंधेर ने कहा कि प्रदेश में जरूरी वस्तुओं की कमी की जिम्मेदार पंजाब सरकार खुद है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अभी तक किसानों की आवाज केंद्र तक पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। सीएम किसानों को बदनाम करने के लिए सरकारी तंत्र का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के भाजपा नेताओं के बयान किसानों को गुमराह करने वाले हैं।

अमृतसर: बैंस बोले- कृषि कानूनों के बारे में गुमराह कर रहे हैं चुग
लोक इंसाफ पार्टी (लिप) के मुखिया एवं विधायक सिमरनजीत सिंह बैंस ने सोमवार को कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग के घर का घेराव कर मोदी सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। मोती बाजार स्थित चुग के घर के बाहर लोक इंसाफ पार्टी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात था। 

बैंस अपने कार्यकर्ताओं के साथ चुग के घर से कुछ दूर सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए। बैंस ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुग कृषि कानूनों के बारे में किसानों को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा नेता किसानों को मौत के वारंट पर हस्ताक्षर करने के लिए कह रहे हैं। पंजाब कृषि प्रधान सूबा है। 

छोटे किसानों से जमीन छीनने के लिए मोदी सरकार कृषि कानून थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों में किसानों की मांग के अनुसार संशोधन करे। वहीं दूसरी ओर किसान संगठनों का भाजपा सांसद श्वेत मलिक के घर के बाहर धरना 12वें दिन भी जारी रहा। किसानों ने मलिक से कहा कि वह कृषि कानूनों के विरुद्ध आवाज उठाएं। उधर, देवीदासपुर के रेल ट्रैक पर किसानों का धरना 19वें दिन जारी रहा।
 

मुक्तसर: कृषि कानूनों के खिलाफ धरने में पहुंचे पंजाबी गायक

कृषि कानूनों के खिलाफ रेलवे स्टेशन पर चल रहे किसानों के धरने में पंजाबी गायक कंवर ग्रेवाल, गुरविंदर बराड़, हरफ चीमा और समाजसेवी लक्खा सिधाना शामिल हुए। गायकों ने कहा कि जिस तरह एकजुटता से संघर्ष चल रहा है, केंद्र सरकार को इन कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार अब किसानों के संघर्ष को बांटना चाहती है, इसलिए खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की कमी की बात कही जा रही है, जबकि किसान स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर कोई ऐसी गाड़ी आती है तो वे रास्ता देंगे।

कोयले की कमी के मामले में पावरकॉम और सरकार के बयान अलग-अलग हैं। किसानों का संघर्ष इन कानूनों के खिलाफ है और यह संघर्ष जब तक किसी मुकाम पर नहीं पहुंचता, तब तक जारी रहेगा।    

केंद्र में सीधे तौर पर शामिल प्रतिनिधि बातचीत को आगे आए: उगराहां 
भाकियू एकता (उगराहां) के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनका मानना है कि केंद्र के इस बुलावे पर किसान संगठनों को बातचीत के लिए जाना चाहिए। हालांकि इस संबंधी अंतिम फैसला 13 अक्तूबर को किसान संगठनों की होने वाली साझा बैठक में होगा।

इस बैठक में केंद्र सरकार में सीधे रूप से शामिल मंत्रियों को बातचीत के लिए आना चाहिए और नए कानून में किसानों की मांगों के मुताबिक संशोधन पर सहमति जतानी चाहिए। उगराहां ने स्पष्ट किया कि किसान संगठनों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा। 

अगले पड़ाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता व कारपोरेट घरानों के व्यापारिक स्थल, किसान जत्थेबंदियों के निशाने पर रहेंगे। साथ ही छोटे व्यापारियों व अन्य कारोबारियों के साथ तालमेल कर उन्हें आंदोलन में शामिल किया जाएगा। किसान संगठनों का आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्वक रहेगा और किसी को भी शांति भंग करने की इजाजत नहीं है।  
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मानसा: किसानों ने डीसी दफ्तर का मेन गेट घेरा

भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की अगुवाई में बड़ी संख्या में किसानों ने सोमवार को डीसी मानसा के दफ्तर का मुख्य द्वार घेर लिया। किसान बुढलाडा रेलवे स्टेशन पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाली बरेह गांव की तेज कौर के परिवार को मुआवजा देने सहित अन्य और मांगों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। 

जानकारी के अनुसार, चार दिन पहले जान गंवाने वाली तेज कौर का पार्थिव शरीर बुढलाडा के सरकारी अस्पताल में फ्रिज में रखा है। चार दिन इंतजार के बाद जत्थेबंदी ने सोमवार को डीसी दफ्तर की ओर कूच किया। पुलिस ने दफ्तर से थोड़ी दूरी पर उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन किसान आगे बढ़ते गए। 

जत्थेबंदी के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा ने कहा कि सरकारों द्वारा किसानों की समस्याओं का हल नहीं किया जाता तो उनको संघर्ष में मैदान में आना पड़ता है। संघर्ष के दौरान अगर किसी की जिंदगी जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की बनती है इसलिए सरकार पीड़ित परिवार को 10 लाख मुआवजा, सारा कर्जा माफ और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे। 

पटियाला में रेलवे ट्रैक पर चल रहा किसानों का धरना समाप्त
भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले गांव धबलान में रेलवे ट्रैक पर चल रहे किसानों के धरने को सोमवार को समाप्त कर दिया गया। इसकी जगह पटियाला-सरहिंद रोड पर गांव बारन के पास पेट्रोल पंप, पटियाला-भवानीगढ़ रोड पर गांव भेड़पुरा के पास पेट्रोल पंप के आगे और नाभा में भाजपा नेता ओम जिंदल के घर के आगे धरने शुरू कर दिए गए हैं। समाना व पातड़ां के न्याल में पेट्रोल पंपों को घेरकर धरने जारी हैं। यूनियन के जिला प्रधान मनजीत सिंह न्याल ने किसानों के आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए सारी ताकत लगाने का एलान किया। 
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