दोआबा ही ऐसा इलाका है, जिसके बलबूते पर पार्टी सरकार बनाती है। दोआबा में होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला और जालंधर का इलाका है। 2002 में जहां कांग्रेस ने दोआबा में प्रचंड बहुमत हासिल किया तो कैप्टन की सत्ता आई, लेकिन 2007 व 2012 में शिअद भाजपा की लहर दोआबा में चली तो बादल सरकार सत्ता में आई।
पूर्व हॉकी खिलाड़ी और विधायक पद्मश्री परगट सिंह के पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बनने से दोआबा कांग्रेस के समीकरण बदलने लगे हैं। परगट सिंह दोआबा के कद्दावर नेता बनकर सामने आए हैं और कई सीनियर नेता हाशिये पर चले गए हैं।
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कांग्रेस में दोआबा की कमान अभी तक किसी नेता के पास नहीं थी, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह व पीपीसीसी के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़, सांसद चौधरी संतोख सिंह और राणा गुरजीत सिंह के अलावा विधायक सुशील रिंकू व राजकुमार चब्बेवाल को तरजीह देते आए थे। अब पीपीसीसी के सारथी परगट सिंह बन गए हैं और तमाम नेता हाशिये पर चले गए हैं।
पद्मश्री परगट सिंह का संगठन में तजुर्बा नहीं है, लेकिन सिद्धू ने उनका कद बढ़ाकर उनको अप्रत्यक्ष रूप से दोआबा का इंचार्ज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दोआबा ही ऐसा इलाका है, जिसके बलबूते पर पार्टी सरकार बनाती है। दोआबा में होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला और जालंधर का इलाका है। 2002 में जहां कांग्रेस ने दोआबा में प्रचंड बहुमत हासिल किया तो कैप्टन की सत्ता आई, लेकिन 2007 व 2012 में शिअद भाजपा की लहर दोआबा में चली तो बादल सरकार सत्ता में आई।
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सिद्धू के लिए दोआबा सत्ता की कुंजी है और दोआबा में उनके पास विश्वासपात्र नेता परगट सिंह ही है, जो 2016 से उनके साथ हैं। कैप्टन सरकार के खिलाफ आवाज उठाने में सिद्धू के साथ परगट कंधे से कंधा मिलाकर चलते आए हैं। ऐसे में सिद्धू ने दोआबा में जहां अपना सारथी खोज लिया है, वहीं कांग्रेस में दूसरे नंबर के कतार के नेता को आगे कर दिया है। चर्चा है कि परगट सिंह का कद कांग्रेस में कैप्टन संदीप संधू के बराबर ही होगा। यह भी सार्वजनिक है कि परगट सिंह ने कैप्टन संदीप संधू पर गंभीर आरोप लगाया था और कहा था कि कैप्टन संदीप संधू ने फोन पर उनको धमकी दी है। संदीप संधू का किसी समय कांग्रेस भवन में सिक्का चलता था और कैप्टन के ओएसडी के साथ साथ वह संगठन में भी सक्रिय थे।