ड्रग व गैंगवार भी कारण हो सकता है
कनाडा में भारतीय खासकर पंजाबी लोगों का नाम ड्रग व गैंगवार में काफी आगे निकल चुका है। चंद दिन पहले ही प्रदीप बराड़ की टोरंटो नाइट क्लब में गोलियां मारी गईं। दो दिन पहले ही कीपर्ज गैंग के मनिंदर धालीवाल को गोलियां मारकर कनाडा विलेज में हत्या कर दी गई, इसके पीछे पंजाबी ही थे। सिद्धू मूसेवाला की हत्या भी कनाडा में रहने वाले गोल्डी बराड़ ने करवाई थी। संदीप नंगल अंबियां की हत्या भी कनाडा से करवाई गई। कनाडा में पंजाब मूल के बड़ी संख्या में लोग ड्रग कारोबार का हिस्सा बन चुके हैं।
पिछले साल पकड़ी 46 करोड़ की ड्रग
कनाडा पुलिस ने पिछले साल अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश कर करीब 1000 किलो ड्रग्स, हथियार व अवैध वाहनों सहित करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें नौ पंजाब मूल के थे। पुलिस ने गिरफ्तार तस्करों से 444 किलो कोकीन, 182 किलो क्रिस्टल मेथ, 427 किलो भांग, 966,020 सी 9 और एक बंदूक, पांच ट्रैक्टर ट्रेलर सहित 21 वाहन जब्त कर उनके खिलाफ कुल 182 आरोप लगाए हैं। बरामद ड्रग्स की कीमत 61 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 46 करोड़) थी। कुछ समय पहले पंजाबी दंपती गुरमिन्द्र सिंह तूर (31) व किरणदीप कौर (26) भी गिरफ्तार हुए, जो एलबर्टा से एक क्विंटल कोकीन ले जा रहे थे। कनाडा में इस समय कुल आबादी 3.75 करोड़ है, जिसमें 17 लाख की आबादी भारतीय मूल के लोगों की है।