बीते लंबे समय से रिटेल और होलसेल दवा विक्रेताओं का विरोध करते आ रही आनलाइन दवा प्रणाली पर आखिरकार रोक लगा दी गई है।
ड्रग कंट्रोलर जनरल की ओर से लगाई इस रोक के बाद अगर कोई कंपनी इसकी उल्लंघना करती है तो उक्त कंपनी पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले लेती। ड्रग कंट्रोलर जरनल ने स्टेट ड्रग इंस्पेक्टर्स से कहा है कि वह दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर नजर रखें और आदेश न मानने वाली कंपनियों पर भी सख्ती बरतें।
सेंट्रल ड्रग रेगुलेटर ने अपने आदेश में कहा है कि बीते कुछ महीनों में कई प्रतिनिधिमंडलों ने उनसे मुलाकात कर दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर गहरी चिंता जताई है।
रेगुलेटर ने माना है कि ऑनलाइन बिक्री मॉडल में ड्रग रिकॉल भी संभव नहीं है और स्टोरेज कंडीशन में भी कंप्रोमाइज हो सकता है।
इसके अलावा दवा रिटेलरों का मानना है कि आनलाइन दवा प्रणाली से नशे के कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। आनलाइन दवा प्रणाली पर रोक लगने के बाद रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान जतिंदर सिंह चावला ने कहा कि यह विभाग का एक सराहनीय कदम है।
आनलाइन दवाओं की सप्लाई का काम सुरक्षित ही नहीं था। सेंट्रल ड्रग रेगुलेटर ने ऑनलाइन दवा मंगवाने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रिस्क्रिप्शन पर सवाल खड़े किए हैं।
अब सरकार को चाहिए कि वह इस तरह की आनलाइन दवा कंपनियों पर सदा के लिए रोक लगा दे। ड्रग कंट्रोलर भाग सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से कभी भी इस ऑनलाइन प्रणाली की अनुमति दी ही नहीं गई थी।
ड्रग कंट्रोलर जनरल की ओर से लगाई गई इस रोक का वे स्वागत करते हैं। अगर इस आदेश के बाद भी कोई ऑनलाइन दवा कंपनी दवा की बिक्री करती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।