नगर निगम की ज्वाइंट कमिश्नर दलजीत कौर के दफ्तर आए कांग्रेसी पार्षद देसराज जस्सल बुधवार को बिना बयान दिए ही वापस लौट गए। जस्सल कुछ दिनों पहले उनके वार्ड में हुई गायकी मौत के मामले में बयान दर्ज करवाने आए थे।
उन्होंने ज्वाइंट कमिश्नर पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए बयान दर्ज करवाने से मना कर दिया। जस्सल ने कहा कि उन्हें कमिश्नर के पास बयान दर्ज करवाने की सूचना आई थी, लेकिन यहां पहुंच कर पता चला कि ज्वाइंट कमिश्नर जांच अधिकारी हैं।
जस्सल ने कहा कि ज्वाइंट कमिश्नर ने उनके साथ सही तरीके से बात नहीं की। इस वजह से वे वापस लौट आए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उनके दफ्तर के बाहर एक गाय जख्मी हालत में पड़ी थी।
उन्होंने निगम हाउस की मीटिंग में मेयर और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन गाय की देखभाल के लिए कोई अधिकारी नहीं आया। इसके बाद गाय की मौत हो गई।
उन्होंने थाना एक में निगम मेयर सुनील ज्योति और संबंधित स्टाफ के खिलाफ पुलिस शिकायत की। पुलिस ने उस शिकायत के सिलसिले में एक चिट्ठी निगम को भेजी।
इसमें अधिकारियों से पूछा गया कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जस्सल ने कहा कि उसी सिलसिले में उन्हें बयान देने के लिए बुलाया गया था।
जस्सल के अनुसार उन्होंने ज्वाइंट कमिश्नर को बताया कि उनके वार्ड में दो और गाय की हालात खराब है। ये दोनों गाय वेरका मिल्ट प्लांट के पास हैं। इन्हें इलाज की जरूरत है।
जस्सल ने आरोप लगाया कि दलजीत कौर ने कहा कि उनके पास गाय की संभाल के लिए कोई साधन नहीं है। उनके इसी नकारात्मक रवैये के चलते उन्होंने बयान देने से इंकार कर दिया और वापस लौट आए।
इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी प्रधान राजिंदर बेरी, कांग्रेसी पार्षद जगदीश राजा उपस्थित रहे। ज्वाइंट कमिश्नर दलजीत कौर ने कहा कि अकेले पार्षद देसराज जस्सल को बयान देने के लिए बुलाया गया था, मगर वे अपने साथ कई पार्षद और नेताओं को लेकर आए गए।
फिर भी उन्होंने कुछ नहीं बोला। जस्सल की ओर से लगाए आरोप सभी बेबुनियाद है। जस्सल खुद ही बिना बयान दिए वापस चले गए।