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ऐसा न हो जबतक मदद पहुंचे बहुत देर हो चुकी हो, हमें निकालिए

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जालंधर। खारकीव छोड़कर पिसोचिन में आकर फंसे भारतीय छात्रों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। वतन वापसी के लिए छात्रों का संघर्ष जारी है। खारकीव से पिसोचिन पहुंचे छात्रों ने कहा कि सिर्फ जगह बदली है हालात अब भी वही हैं। न वहां खाने को मिल रहा था न यहां मिल रहा है। पिसोचिन में फंसे जालंधर के अनिकेत शर्मा, स्नेहा गुप्ता, अजय आहूजा व जतिन सहगल ने भारत सरकार व दूतावास से उन्हें जल्द निकालने की गुहार लगाई।
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बंकर में छिपी स्नेहा गुप्ता ने कहा कि 2 मार्च को एडवाइजरी जारी हुई कि खारकीव छोड़ दें तो हम साथियों सहित वहां से निकले और 18 किलोमीटर पैदल चल पिसोचिन पहुंच गए। हमने रास्ते में आसमान से आग बरसते हुए देखी है और अब भी धमाकों की आवाज सुनकर डर लगा रहता है कि कहीं कोई छात्र इस बमबारी का शिकार न हो जाए।
स्नेहा ने बताया कि वह खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्रा हैं। जब वह साथी अनिकेत शर्मा व अन्य के साथ 3 मार्च की शाम 5 बजे पिसोचिन पहुंचीं तो उन्हें खाने के लिए दो ब्रेड दिए गए, जबकि हम दो दिन से भूखे-प्यासे थे। खाने की बहुत तंगी है और ठीक से खाना नहीं मिल पा रहा। हमें सरकार व भारतीय दूतावास की ओर से कोई मदद नहीं मिली, हम जो कुछ भी कर रहे हैं अपने स्तर पर कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि हम मिसाइलों के साये में हैं हर आधे घंटे में आवाजें सुनाई देती हैं तो लगता है कि कहीं कोई अनहोनी न घट जाए। हमें पता है मिसाइल आनी है पर कहां आनी है ये तो पता नहीं है, जैसे हालात खारकीव में थे वैसे ही पिसोचिन में भी हैं। सरकार पिछले 5 दिनों से कह रही है कि ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है तो फिर उस पर काम क्यों नहीं हो रहा। यहां पर ठंड के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं न कोई सुविधाएं हैं न दवाएं, इस कारण दिक्कतें और भी बढ़ गई हैं।
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सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द ग्रीन कॉरिडोर खोल हमें यहां से निकाला जाए। यहां खाना बनाने वाला स्टाफ है लेकिन खाना नहीं मिल रहा, किचन में दो लोग हैं लेकिन हमें खुद से खाना बनाना पड़ रहा है।
पिसोचिन में फंसे अन्य राज्यों के छात्रों ने भी अपना दर्द बयां किया। वीडियो में छात्र ने बताया कि जब हम ट्रेन में चढ़ रहे थे तो यूक्रेनी पुलिस ने हाथों पर पैर मारे, जिससे उन्हें चोटें आई और वह ट्रेन पर भी नहीं चढ़ सके। 30 किलोमीटर पैदल चलने के बाद पिसोचिन पहुंचे। यहां सैकड़ों बच्चे फंसे हैं भारतीय दूतावास को सक्रियता दिखाते हुए हमें यहां से निकालना चाहिए। यहां हालात खराब होते जा रहे हैं।
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