पंजाब विधानसभा चुनाव का समर शुरू हो चुका है। दोआबा व माझा में इस बार दलित व पंथक वोट तय करेगा कि सत्ता की चाबी किसके हाथ देनी है। लिहाजा तमाम राजनीतिक पार्टियों में दलित व पंथक वोट को लेकर घमासान मचा हुआ है। 2017 के मुकाबले इस बार चुनाव बिलकुल अलग होने जा रहे हैं। इस बार मुकाबला चार कोणीय है हालांकि अभी तक संयुक्त समाज मोर्चा की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है। लेकिन अगर संयुक्त समाज मोर्चा मैदान में दमखम से उतरता है तो मुकाबला पांच कोणीय हो सकता है।
इस बार अकाली दल पंथक वोट की वापसी के लिए काफी संघर्ष कर चुका है और हाल ही में बेअदबी की घटनाओं को लेकर रोष दिवस भी मनाया गया है। नाराज पंथक नेताओं को मनाने के साथ ही ब्रह्मपुरा, अजनाला परिवार की अकाली दल में वापसी हो गई है। अकाली दल को इस बार अपना वोट बैंक वापस आने की उम्मीद है।
आम आदमी पार्टी ने भी कम दांव नहीं खेला है। अमृतसर से कुंवर विजय प्रताप को मैदान में उतारा है। कुंवर विजय प्रताप बेअदबी की घटनाओं की जांच करने वाले अधिकारी थे और उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। कुंवर विजय प्रताप को माझा से लड़ाया जा रहा है, इसलिए आप को भी पूरी उम्मीद है कि पंथक वोट बैंक उनकी तरफ आ जाएगा। वहीं कांग्रेस ने अपने दोनों डिप्टी सीएम माझा इलाके से दिए हैं। सुखजिंदर रंधावा व ओपी सोनी दोनों माझा से हैं। इसलिए कांग्रेस अपनी पूरी ताकत माझा में झोंक रही है। पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी माझा से हैं।
दोआबा में 42 फीसदी वोट दलितों के हैं। 23 विधानसभा सीटों में से पिछली बार 15 सीटें कांग्रेस के खाते में आई थीं जबकि अकाली दल 5 सीटें व आप दो व भाजपा के हिस्से एक सीट आई थी। दोआबा में अकाली दल के तीन विधायक दलित हैं, जो पिछली बार दोआबा में जीते थे। इस बार अकाली दल ने बसपा का सहारा लिया है और उनके लिए 20 विधानसभा सीटें छोड़ी हैं। सुखबीर बादल ने सूबे में डिप्टी सीएम की कुर्सी भी दलित को देने का वादा कर रखा है। अकाली दल का दलितों की सीटों पर मजबूत वोट बैंक है। कांग्रेस अपना घर बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही है। चन्नी लगातार दोआबा में सक्रिय रहे हैं।
कांग्रेसियों को चन्नी से काफी उम्मीद है। वह रविदासिया समाज से हैं और दोआबा रविदासिया समाज का गढ़ माना जाता है। चन्नी लगातार रविदासिया समाज के डेरे सच्चखंड बल्लां में आ रहे हैं और वहां पर 25 करोड़ की राशि भी दी गई है। वहीं भाजपा भी दोआबा में ताकत झोंक रही है। दोआबा से दलित नेता विजय सांपला को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन बनाया गया। इसके अलावा दोआबा से ही लोकसभा सांसद सोमप्रकाश को केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया। भाजपा अपना दलित कार्ड खेल रही है। आम आदमी पार्टी की तरफ से भी दोआबा को फोकस कर ताकत झोंकी जा रही है। संयुक्त समाज मोर्चा भी मैदान में आ रहा है। यहां के आलू किसानों ने संयुक्त समाज मोर्चा का हाथ पकड़ लिया है और मैदान में तैयारी शुरू कर दी है। कुल मिलाकर इस बार माझा व दोआबा में दिलचस्प मुकाबला होने के आसार बन गए हैं।