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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिरामिड के निचले स्तंभ, उनकी दुर्दशा से फर्क न पड़ना निराशाजनक: हाईकोर्ट

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-चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से द्वितीय श्रेणी नागरिकों जैसा बर्ताव स्वीकार नहीं
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-सेवा के मामलों में विस्तृत आदेश जारी करने का हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार और उसकी लोकल बॉडीज को सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की अनदेखी करने और ग्रुप डी के कर्मचारियों के साथ द्वितीय श्रेणी नागरिकों जैसा बर्ताव करने के लिए फटकार लगाई है। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को सर्विस मामलों में विस्तृत आदेश जारी करने का निर्देश जारी किया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि कोर्ट को बहुत निराशा हुई है कि ग्रुप डी कर्मचारियों की बुरी हालत से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता जो पिरामिड के सबसे निचले स्तर पर हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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बेंच ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एक हेल्पर की रिटायरमेंट बेनिफिट्स की अर्जी को 50,000 रुपये मुआवजे के साथ मान लिया। बेंच ने कहा कि रिटायरमेंट लाभ देने में हुई बेवजह देरी के लिए 50,000 रुपये जुर्माना लगाना यह अदालत सही समझती है। सरकार को गलती करने वाले ऑफिसर की जिम्मेदारी तय करने और रकम वसूलने की आजादी होगी। दिलबाग सिंह 36 साल से ज़्यादा की सर्विस के बाद हेल्पर के तौर पर रिटायर हुए जिसमें डेली वेज और वर्क-चार्ज इम्प्लॉई के तौर पर उनका समय भी शामिल हैं लेकिन उन्हें सिर्फ लीव इनकैशमेंट और जीपीएफ का एक हिस्सा मिला। साफ कानून होने के बावजूद उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी और दूसरे रिटायरमेंट लाभ का भुगतान नहीं हुआ। सरकार ने सिर्फ गुरदासपुर म्युनिसिपल काउंसिल के लीगल एडवाइजर की राय के आधार पर उनके दावे को खारिज कर दिया। जस्टिस बराड़ ने निर्देश दिया कि पेंशन के लिए शुरुआती अपॉइंटमेंट से पिछली सर्विस को क्वालिफाइंग सर्विस के तौर पर गिनें और अक्तूबर 2024 में रिटायरमेंट से असल पेमेंट तक रिटायरमेंट फायदों की बची हुई रकम पर 6 परसेंट सालाना ब्याज दें।
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