संवाद न्यूज एजेंसी
जालंधर। सिविल अस्पताल की एक डॉक्टर पर एमएलआर काटने के एवज में पैसे लेने का आरोप लगा कुछ जत्थेबंदियों ने हंगामा कर दिया। सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर हंगामा कर दिया। हंगामे की खबर मिलते ही थाना 4 के प्रभारी मुकेश कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। इस दौरान आरएएफ समेत भारी पुलिस फोर्स अस्पताल के अंदर और बाहर तैनात कर दी गई। जत्थेबंदी तरना दल के बाबा लखबीर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें डॉ. हरवीन कौर के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं। उन्होंने डॉ. हरवीन कौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनके पास आने वाले मरीज को जितने मर्जी गंभीर चोट लगी हो व 307 का पर्चा ही क्यों न बन रहा हो, लेकिन वह 323 का पर्चा बनाकर मामला खत्म कर देती हैं। अगर इन्हें पीड़ित परिवार से पैसे मिल जाए तो 23 के पर्चे को 307 में तब्दील कर देती हैं। उन्होंने कहा कि एक हमारा साथी है बलविंदर, जिस पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। हमले में उसे कईं गंभीर चोटें आई व उसके सिर पर भी हथियारों से कट लगाए गए। उसको जब सिविल अस्पताल में लाया गया तो डॉक्टर ने मात्र 323 का पर्चा बनाकर मामला निपटा दिया। दूसरा मामला रामा मंडी का था, जिसमें एक व्यक्ति के सिर पर हथियार से हमला कर उसका सिर काट दिया गया था, उसमें भी इस डॉक्टर ने मात्र 323 का पर्चा बना दिया। जब इसका विरोध हुआ तो बोर्ड की मीटिंग हुई तब जाकर इस मामले में 307 का पर्चा बनाया गया। ऐसे अन्य मामले हैं, जिसकी शिकायतें उनके पास आई हैं। उन्होंने कहा कि सीएम मान कह रहे हैं कि पंजाब में अब ईमानदार सरकार है, लेकिन इन जैसे डॉक्टर की वजह से सरकार पर भी सवाल उठते हैं कि सरकार क्या कर रही है। यह डॉक्टर अगर सिविल सर्जन की पद पर तैनात कर दी गई तो यह लोगों से पर्चा कटवाने का महीना लेना शुरू कर देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सिविल सर्जन के साथ मीटिंग रखी गई है व डॉक्टर पर कार्रवाई न हुई तो धरना शुरू करेंगे।
डॉ. हरवीन कौर ने दर्ज करवाए बयान, एमएस बोली जांच जारी
एमएस गीता का कहना है कि डॉ. हरवीन कौर पर लगे आरोप के बाद एक बोर्ड का गठन किया गया है। यह बोर्ड इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। आज मामले में बोर्ड ने डॉ. हरवीन कौर को तलब किया था। हरवीन कौर ने पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने कोई रिश्वत नहीं ली, बल्कि उन्होंने मौके पर मरीज की स्थिति व चोटें देखकर ही सभी रिपोर्ट बनाई हैं। उन पर 323 के मामले को 307 का बनाने के लिए दबाव डाला जाता है, लेकिन यह डॉक्टर ने देखना होता है कि मामला 323, 326 का है या फिर 307 का है। एमएस गीता का कहना है कि बोर्ड फिलहाल मामले की जांच कर रहा है। इस मामले में दूसरे पक्ष को बुलाकर उनकी बात सुनी जाएगी, जिसके बाद बोर्ड अपना फैसला सुनाएगा। अगर कोई आरोपी पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
यह है मामला
रामा मंडी के रहने वाले एक व्यक्ति पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। इस हमले के बाद व्यक्ति को सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। घायल व्यक्ति के परिजनों का कहना था कि मामले में एमएलआर में 307 दर्ज होनी चाहिए, जबकि डॉ. हरवीन कौर का मानना था कि मामला 323 से ज्यादा का नहीं है। इस पर घायल व्यक्ति के परिजनों ने डॉ. हरवीन कौर पर 323 को 307 का मामला बनाने पर रिश्वत की मांग करने के आरोप लगाए थे। यह मामला एमएस तक भी पहुंचा था, लेकिन परिजनों का कहना था कि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे गुस्साए व्यक्ति के परिजनों व कुछ जत्थेबंदियों ने शुक्रवार को सिविल अस्पताल में हंगामा किया व डॉ. हरवीन कौर को सस्पेंड करने की मांग की। अब यह मामला बोर्ड की जांच पर आकर अटक गया है।