मुक्तसर। दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चालीस सिंहों की याद को समर्पित नगर कीर्तन निकाले जाने के साथ ही मेला माघी शनिवार को रवायती तौर पर संपन्न हो गया। गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब प्रबंधकीय कमेटी की ओर से नाका नंबर चार से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया और पांच प्यारों की अगुवाई में भव्य नगर कीर्तन शुरू हुआ, जिसका शहर में विभिन्न जगह भव्य स्वागत हुआ।
जलालाबाद रोड पर चल रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के कारण इस बार नगर कीर्तन का रूट मलोट रोड से रेलवे रोड, मस्जिद चौक, बैंक रोड, घास मंडी, अबोहर रोड से मौड रोड रेलवे फाटक क्रॉसिंग कर फैक्टरी रोड, पुरानी दाना मंडी से टिब्बी साहिब रोड रहा। गुरुद्वारा टिब्बी साहिब पहुंचकर संगत यहां नतमस्तक हुई। इसके बाद नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री रकाबसर साहिब, गुरुद्वारा दातनसर साहिब में नमन करने के बाद जलालाबाद रोड से मौड रोड होता हुआ वापस नाका नंबर सात पर पहुंचकर संपन्न हुआ।
नगर कीर्तन में संगत की आस्था का सैलाब उमड़ा नजर आया। आसमान सतनाम वाहेगुरु और जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारों से गूंज उठा। पालकी साहिब के दर्शनों को संगत उमड़ रही थी। नगर कीर्तन में सबसे आगे नंगे पांव चल रही संगत झाड़ू लगाकर सड़क साफ कर आस्था प्रकट करती नजर आई। बैंड वाले मनमोहक धुनें बजा रहा थे, रागी जत्था कीर्तन कर रहा था। निहंग-सिंह नौजवानों की ओर से जहां गतका के जौहर दिखाए जा रहे थे वहीं निहंग-सिंहों के छोटे बच्चे भी गतका का शानदार प्रदर्शन कर रहे थे। नगर कीर्तन के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सख्त सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। कई जगह नगर कीर्तन का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत हुआ। संगत के लिए पनीर, मैकरोनी, मैगी, दाल-रोटी समेत विभिन्न तरह के अटूट लंगर भी चलते रहे।
गुरुद्वारा साहिबानों के दर्शनों को दूरदराज से आने वाली संगत मेले के रवायती तौर पर संपन्न होने के साथ लौटने लगी है। उधर, गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब में कीर्तन समागम भी चलता रहा। गुरुद्वारा तंबू साहिब में इच्छुक संगतों को अमृत संचार भी कराया गया। दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्री दरबार साहिब के पवित्र सरोवर में संगत ने स्नान कर पुण्य लाभ कमाया।
निहंग-सिंहों ने किया शौर्य प्रदर्शन, आकर्षण का केंद्र रहे हाथी-घोड़ों पर सवार निहंग
एक तरफ जहां गुरुद्वारा साहिब की ओर से नगर कीर्तन निकाला गया, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राज्यों से आए निहंग सिंहों ने महला निकाल शौर्य का प्रदर्शन किया। इस दौरान जहां हाथी-घोड़ों पर सवार निहंग सिंह आकर्षण का केंद्र बने रहे, वहीं हथियारों, बंदूकों व शस्त्रों सहित महला निकाल रहे निहंग भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंच रहे थे। टिब्बी साहिब रोड पर निहंग सिंहों ने घुड़दौड़ दौरान देर शाम हैरतअंगेज करतब भी दिखाए। 16 जनवरी से निहंग सिंह अपने-अपने शहरों व राज्यों को लौटने शुरू हो जाएंगे।
बरछे व भालों की खरीदारी पर जोर
गुरुद्वारा टिब्बी साहिब रोड के पास मेले में लगी स्टालों में निहंग-सिंह और ग्रामीण लोग बरछे व भाले की खरीदारी को तरजीह दे रहे थे। इस रोड तथा मलोट रोड पर बरछे व भालों की अनेकों स्टालें लगी थीं, जहां निहंग सिंह अपनी पसंद के शस्त्र खरीदते नजर आए। ऐसा पहली बार हुआ है कि मेला माघी रवायती तौर पर संपन्न हो गया है और दूसरी तरफ मलोट रोड पर पिछले दिनों हुई बारिश के कारण मनोरंजन मेला अभी तक शुरू भी न हो सका है।
नूरदीन की मजार पर संगत ने बरसाए जमकर जूते
संगतों ने गुरुद्वारा श्री दातनसर साहिब के पास स्थित नूरदीन की कब्र पर जमकर जूते भी बरसाए। कहते हैं कि इस जगह पर जब गुरु गोबिंद सिंह जी दातुन कर रहे थे, तब नूरदीन ने पीछे से बरछे से उन पर वार करना चाहा था। गुरु जी ने अपना बचाव करते हुए हाथ में पकड़े लोटे से ही वार कर उसे मार गिराया था, तब से इस जगह पर मेला माघी के दिन संगतों का हुजूम नूरदीन की मजार पर पहुंचता है और जमकर जूते बरसाते हुए गुरु जी प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता है।