संसद में चल रहे मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और उन्हें पंजाब के किसानों के मांगपत्र सौंपे। संत सीचेवाल ने कहा कि किसानों की मांगें जायज है।
पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों की तरफ से दिए गए मांगपत्र केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपे। संत सीचेवाल ने शुक्रवार को संसद में चल रहे मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान संत सीचेवाल ने किसानों की मांगें मानने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर संगठन अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। संगठनों की तरफ से दिए गए मांगपत्र में उनकी मांगें जायज हैं और पंजाब तथा देश के हित में हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि डेढ़ साल तक चले किसान आंदोलन के दौरान भी केंद्र सरकार ने किसानों की जो मांगें मानी थीं, उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके चलते किसान और मजदूर फिर से संघर्ष की राह पर हैं।
उन्होंने कृषि मंत्री से अपील की कि किसानों और मजदूरों को सड़कों पर न रोला जाए, बल्कि उनके लिए खेतों में ही काम करने का माहौल बनाया जाए, ताकि वे खाद्यान्न उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। किसानों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों के आपसी रिश्ते इस देश की प्रगति में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसकी जनसंख्या का बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है।
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संत सीचेवाल ने कहा कि पंजाब और देश के किसान और मजदूर बहुत मेहनती हैं। वे अपने खेतों में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उनके श्रम का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है। क्योंकि उन्हें फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं दिया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार किसानों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और इन मांगों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी। मांगपत्र सौंपने वाले संगठनों में किसान यूनियन पंजाब, संयुक्त किसान मोर्चा सुल्तानपुर लोधी कपूरथला और अन्य संगर्षशील संगठन शामिल हैं।
गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में हिस्सा ले रहे राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल पहले दिन से ही सदन में किसानों की मांगों को गंभीरता से उठा रहे हैं। वहां वे जलवायु परिवर्तन से प्रभावित किसानों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति को भी बखूबी सदन में रख रहे हैं।