कमलजीत भाटिया पार्टी के प्रति वफादारी और बेटे की कुर्बानी को याद कर रो पड़े। 2022 के विस चुनाव में सेंट्रल हलके से दावेदारी जताने के बाद भी टिकट नहीं मिला था। दुख की घड़ी में सीनियर लीडरशिप के न पहुंचने से नेता नाराज थे।
पंजाब के जालंधर में बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूती देने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी शिरोमणि अकाली दल की सीनियर लीडरशिप को भारी पड़ गई। बुधवार को पार्टी के पंजाब प्रधान और जालंधर के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रहे कमलजीत सिंह भाटिया ने पार्षद और 46 नेताओं सहित दल की सभी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा उन्होंने पार्टी प्रधान को भेज दिया है।
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कमलजीत भाटिया ने कहा कि करीब 36 साल उन्होंने पार्टी की सेवा की और हमेशा पार्टी के सुख-दुख में साथी रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जालंधर सेंट्रल हल्के से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने इसे नजर अंदाज कर दिया। पार्टी ने हारने के बाद भी अपने कार्यकर्ताओं को पूछा तक नहीं। कुछ लीडरों को जरूर पूछा गया जो पार्टी की हार के जिम्मेदार थे।
जालंधर में बैकफुट पर कोच्चि शिरोमणि अकाली दल को कैसे मजबूत किया जाए इसके बारे में आज तक उनसे कोई सलाह मश्वरा नहीं किया गया और न ही कोई सीनियर नेता उनसे मिलने आए। महिला विंग की सदस्यों के साथ इस्तीफा देते हुए भाटिया ने कहा कि हमेशा समाज व पार्टी की सेवा की है।
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साल 2011 का वह दिन याद है जब निगम चुनावों के दौरान पार्टी की सेवा करते हुए अपना बेटा को दिया था। वे यह बताते हुए रो पड़े। जालंधर में दो नेताओं की मौत हो जाती है और पार्टी हाईकमान घर आकर हौसला बढ़ाने की तो छोड़ो अफसोस तक नहीं जताते हैं।
भाटिया ने कहा कि आने वाले समय में चुनाव भी जरूर लड़ेंगे। अभी किसी पार्टी में जाने के लिए कुछ ऐसा सोचा नहीं है। चुनाव होने के बाद कई बार प्रधान सुखबीर सिंह बादल जालंधर आए हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आई कि अब पार्टी के प्रधान के साथ चंद लोग ही रह गए हैं जो दलबदलू हैं।