मां की गोद में सिर रखकर लेटे हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह।
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भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह का कहना है कि अगली बार ओलंपिक गेम्स में मेडल का रंग जरूर बदलेगा, उनकी टीम पूरी तरह से उत्साह से भरी हुई है। मनप्रीत सिंह अपने साथी खिलाड़ियों मंदीप और वरुण के साथ गांव मिट्ठापुर पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से मुखातिब होकर उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में विश्व हॉकी कप में भारतीय हॉकी टीम एक शानदार प्रदर्शन करेगी, यह तय है।
मनप्रीत सिंह ने कहा कि जीत हार का दिन होता है। कई बार टीम अच्छा खेलती है लेकिन भाग्य साथ नहीं देता, बस ऑस्ट्रेलिया के भाग्य ने उनका साथ दिया। उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छा खेली थी लेकिन वह दिन ऑस्ट्रेलिया का था। फिर भी वे ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद निराश नहीं हुए। टीम का मनोबल न गिरे, इसलिए सारी टीम को मोटिवेट किया और उनमें जोश भरा कि अभी कांस्य पदक की उम्मीद है।
मनप्रीत ने कहा कि वैसे तो वह सोने का पदक जीतने की क्षमता रखते थे और यही सोच लेकर टोक्यो ओलंपिक खेलने गए थे। लेकिन फिर भी मनोबल नहीं गिरने दिया। कांस्य पदक से 41 साल बाद हॉकी के नए युग की शुरुआत हुई है और हॉकी में अब युवाओं का रुझान बढ़ेगा। मनप्रीत ने कहा कि लड़कियों की टीम भी अच्छा खेली थी। कांस्य पदक के मैच से पहले उनकी टीम को पुरुष टीम ने पूरे टिप्स दिए और जोश भरा था, पर बात वही है कि जीत हार का दिन होता है। इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि लड़कियां कांस्य पदक नहीं जीत पाईं।
पहले गुरुद्वारा साहिब फिर गांव के हॉकी मैदान को दिखाए मेडल
कप्तान मनप्रीत सिंह, वरुण और मंदीप सिंह जब जालंधर पहुंचे तो रामामंडी चौक से लेकर विभिन्न स्थानों पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। कई स्थानों पर फूल बरसाए गए और खिलाड़ियों के गले में फूल मालाएं डाली गईं। गांव में पहुंचते ही ढोल की थाप पर महिलाएं नाचती नजर आईं। तीनों खिलाड़ियों ने गांव के गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका और कीर्तन श्रवण किया। इसके बाद तीनों गांव में हॉकी मैदान में गए, जहां उन्होंने मैदान में मेडल दिखाकर नमन किया। गांव के हॉकी मैदान में हॉकी खेलने वाले छोटे बच्चों ने उनका जोरदार ढंग से स्वागत किया और फूल बरसाए।