स्कूल की सभी कक्षाएं स्मार्ट है
प्रिंसिपल डॉ. सतिंदर सिंह कई अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में बतौर प्रिंसिपल तैनाती हुई तो स्कूल की हालत बहुत खस्ता थी। करीब चार सौ बच्चे पढ़ते थे और शिक्षक सिर्फ सात। अब इस स्कूल में आठ सौ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें 24 शिक्षक पढ़ाते हैं। सरकार के अलावा दानी सज्जनों के सहयोग से इमारत में सुधार किया है, छह नए कमरे बनाए हैं। स्कूल की सभी कक्षाएं स्मार्ट हैं। स्कूल में आरओ लगवाया है। 12वीं पास करने वाले ज्यादातर विद्यार्थी बीएसएफ व सेना में भर्ती हो रहे हैं। लड़कियां ईटीटी करके शिक्षक बन रही हैं। स्कूल में ऐसी साइंस लैब तैयार की है जो किसी प्राइवेट स्कूल में नहीं होगी। लाइब्रेरी है, जहां बैठकर बच्चे विभिन्न पुस्तकें पढ़ते हैं।
टापू से घिरे स्कूल में पहुंचने के लिए नाव ही जरिया
प्रिंसिपल ने बताया कि इस इलाके में एक टापू है, जो सतलुज दरिया से घिरा हुआ है, जिसका नाम कालू वाला है। यहां से स्कूल पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र जरिया है। पहले एक छात्र पढ़ने आता था, अब पंद्रह बच्चे आते हैं। इसीलिए इस टापू पर प्राइमरी स्कूल स्थापित किया है ताकि छोटे बच्चे पढ़-लिख सकें।