दिव्यांग बेटे का सपना पूरा करने के लिए मजदूर पिता ने दिन रात एक कर दिया। उनकी कोशिश की बदौलत बेटा न केवल शिक्षित हुआ बल्कि क्रिकेटर भी बना। उसका सपना अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का है।
19 से 25 जून तक दिल्ली में आयोजित होने वाले आईडब्ल्यूपीएल टूर्नामेंट में विक्की पंजाब की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगे। विक्की का कहना है कि उनके पिता ने अपना फर्ज निभा दिया है, अब उनकी बारी है कि वह अपने पिता व देश का नाम रोशन कर कर्ज उतारे। विक्की का कहना है कि सरकारी स्तर पर भी खेलों को प्रोत्साहित करना चाहिए। खासकर दिव्यांग खिलाड़ियों को अधिक से अधिक मौका दिया जाना चाहिए ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
हंसराज ने बताया कि विक्की जन्म के समय बिलकुल स्वस्थ था। करीब डेढ़ साल बाद पोलियो के कारण उसकी पैर निष्क्रिय हो गए। उन्होंने काफी इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने कभी बेटे को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह दिव्यांग है। उसका हमेशा हौसला बढ़ाते रहे। उसे पढ़ाने के लिए खूब मेहनत मजदूरी की। शिक्षित किया। इसके बाद उसने क्रिकेटर बनने की ठानी तो उसका सपना पूरा करने में मदद की।
विक्की कहते हैं कि आज जो कुछ भी बन पाया हूं, वह अपने पिता की बदौलत ही संभव हुआ है। इसका पूरा श्रेय उनकी मेहनत को है। मुझे अपने पिता पर गर्व ह्रै, जिन्होंने अपनी हैसियत से बढ़कर मेरे सपनों को पूरा करने के लिए ताकत झोंक दी। मैं उनका कर्ज कभी नहीं उतार सकता।