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प्राथमिक स्कूल खोलने की मांग: सड़क पर उतरे किसान व अध्यापक, चंडीगढ़-बठिंडा मुख्य मार्ग जाम किया

Mon, 07 Feb 2022 06:32 PM IST
ajay kumar अमर उजाला/ संवाद न्यूज एजेंसी, बरनाला/पटियाला (पंजाब)

सार

राष्ट्रीय मार्ग पर जाम लगने के कारण सरकारी व निजी बसों में सफर कर रही सवारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सवारियों को करीब दो-तीन किलोमीटर पैदल चलकर हंडिआया चौक आना पड़ा। इस दौरान महिलाओं व छोटे बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हुई।
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पटियाला में किसानों ने सड़क जाम की। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना की वजह से प्राथमिक स्कूलों को बंद करने के फैसले के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन डकौंदा ने कस्बा हंडिआया के नजदीक बठिंडा-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को दोपहर 12 बजे से दो बजे तक जाम कर दिया। ब्लाक प्रधान परमिंदर सिंह हंडिआया, महासचिव बाबू सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी की आड़ में सरकार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। 

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सरकार ने बेशक छठी से ऊपर की कक्षाओं के स्कूलों को खोल दिया है लेकिन छोटी कक्षाओं के लिए स्कूल न खोलने के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है जबकि छोटी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई स्कूल में करवाना जरूरी है, क्योंकि छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ नहीं आती। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो वादे किए गए थे, वह पूरे नहीं किए हैं। पंजाब सरकार द्वारा दो एकड़ और पांच एकड़ वाले किसानों का कर्जा माफ करने का एलान किया गया था लेकिन अभी तक किसी भी किसान का कर्जा माफ नहीं किया गया है।

पटियाला में भी किसानों और अध्यापकों ने सड़कों पर लगाया जाम
पटियाला-संगरूर रोड पर गांव पसियाना के नजदीक चौक के अलावा पटियाला-चीका रोड पर गांव पंजोला के नजदीक विभिन्न किसान और अध्यापक जत्थेबंदियों ने सोमवार को जाम लगाकर सरकार के खिलाफ धरना दिया। इस मौके पर प्राइमरी स्कूलों को भी खोलने और साथ ही पिछले दिनों हुई बारिश से खराब फसलों का मुआवजा पीड़ितों को देने की मांग की गई। 
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मांगें पूरी न होने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई। इस मौके भारतीय किसान यूनियन की तरफ से किसान नेता गुरमेल सिंह, गुरदर्शन सिंह, सुरजीत सिंह, किरती किसान यूनियन से दविंदर सिंह पुनिया व डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा कभी क्लास एजुकेशन की जगह नहीं ले सकती है। 

कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से पहले ही बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। साथ ही इससे बच्चों का बौद्धिक विकास भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में सरकार को प्राइमरी स्कूलों को भी खोलने की अनुमति दे देनी चाहिए। इस दौरान किसानों का कर्ज माफ करने, नरमे की फसल के लिए घोषित मुआवजा तुरंत देने की भी मांग की। 

किसान नेताओं ने आगे कहा कि पिछले दिनों बारिश के कारण आलू व मटर की खेती बड़े स्तर पर खराब हुई है। गेहूं की फसलों का भी काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में सरकार को तुरंत गिरदावरी करवाकर पीड़ित किसानों को वाजिब मुआवजा देना चाहिए। किसान तो पहले ही कर्ज की मार के कारण बदहाल जीवन जी रहा है। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।

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गुरदासपुर: संगठनों ने डाकखाना चौक पर दो घंटे किया चक्का जाम
पहली से पांचवीं तक स्कूल खुलवाने, गेहूं व आलू की फसल खराब होने का मुआवजा देने और गन्ने की बकाया राशि किसानों को देने की मांग को लेकर सोमवार को विभिन्न किसान संगठनों ने डाकखाना चौक पर चक्का जाम किया। दोपहर 12 बजे से दो बजे तक चक्का जाम के दौरान किसानों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से पंजाब में छठी के बाद सभी संस्थाएं खोलने की घोषणा की है, जो पंजाब किसान मजदूर मुलाजिम और विद्यार्थी संगठनों की जीत है। अब उन्होंने स्कूलों को पूर्ण रूप से खुलवाने, गन्ने का बकाया किसानों को दिलाने, गेहूं व आलू की खराब फसल का मुआवजा दिलाने की खातिर जाम लगाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। ऑनलाइन पढ़ाई से विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता बहुत कम हो चुकी है। 

पंजाब में पिछले दिनों हुई बेमौसमी बारिश के कारण आलू और गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पंजाब सरकार बेमौसम बारिश के कारण खराब गेहूं व आलू की फसल की विशेष गिरदावरी कर किसानों को मुआवजा दे। इसी तरह 2018-19 में भी गेहूं नष्ट हुई थी, जिसका मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिला है। यदि इन मांगों को स्वीकार न किया गया तो आने वाले दिनों में पंजाब के किसान संगठनों बड़ा संघर्ष लामबंद करेंगे। 
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